अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराया, ट्रंप बोले- तेहरान करना चाहता है डील लेकिन शर्तें नहीं मान रहा

Praggya Singh sabal22 August 20263 min read69 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराया, ट्रंप बोले- तेहरान करना चाहता है डील लेकिन शर्तें नहीं मान रहा

अमेरिका और ईरान के बीच आर्थिक और राजनीतिक तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ईरान अमेरिका के साथ एक समझौता करने के लिए पूरी तरह से उत्सुक है, लेकिन तेहरान अभी तक वाशिंगटन की मौजूदा शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि भले ही ईरान बातचीत करना चाहता हो, लेकिन वे अभी तक किसी ऐसे निष्पक्ष समझौते पर सहमत नहीं हुए हैं जो अमेरिका को मंजूर हो।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी मौजूदा प्रशासनिक रणनीति को Economic D-Day का नाम दिया। उन्होंने इसे ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और सबसे कठोर आर्थिक ऑपरेशन बताया है। इस विशेष अभियान का मुख्य लक्ष्य ईरानी तेल की तस्करी, वित्तीय लेन-देन, एक्सचेंज हाउस, जहाज रजिस्ट्रियों और कई फर्जी कंपनियों को निशाना बनाना है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की है ताकि ईरान पर पूरी तरह से आर्थिक शिकंजा कसा जा सके।

ईरान ने अमेरिकी दबाव को सिरे से नकारा

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अमेरिकी प्रशासन के इस आक्रामक रुख पर ईरान की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने अमेरिका के इस दबाव वाले अभियान को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह रणनीति पूरी तरह से असफल होने वाली है। पुराने कूटनीतिक तनावों को याद करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में अमेरिका ने कई बार ईरान पर crippling sanctions, maximum pressure और unconditional surrender जैसी नीतियां थोपने की कोशिश की थी, लेकिन वे हर बार बुरी तरह विफल रहे। उन्होंने इस मौजूदा आर्थिक ऑपरेशन को एक बार फिर से वही पुराना और असफल तरीका बताया है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को लेकर मचा घमासान

दोनों देशों के बीच यह तनातनी अब जलमार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज तक पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि यह महत्वपूर्ण जलमार्ग इस समय पूरी तरह से अमेरिकी क्षेत्र यानी American territory है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को ईरानी अधिकारियों ने तुरंत और बहुत ही कड़े शब्दों में खारिज कर दिया। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने ऐलान किया कि यह जलमार्ग तब तक पूरी तरह से बंद रहेगा जब तक संयुक्त राज्य अमेरिका एक 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन यानी memorandum of understanding को पूरी तरह से पूरा नहीं कर देता है।

ईरान की तरफ से यह भी साफ कर दिया गया है कि जलमार्ग को दोबारा खोलने के लिए कुछ खास शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें मुख्य रूप से नाकाबंदी को हटाना, ईरान की रुकी हुई और फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस जारी करना और ईरानी तेल पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों में ढील देना शामिल है। जब तक अमेरिका इन शर्तों को नहीं मानता, तब तक ईरान अपने रुख पर कायम रहेगा।

ईरान की सैन्य तैयारी और रक्षा कवच

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरानी सैन्य नेताओं ने भी बहुत ही आक्रामक और रक्षात्मक रुख अपनाया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर-इन-चीफ Ahmad Vahidi ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि ईरान ने अपनी सुरक्षा के लिए एक बेहद मजबूत और ठोस डिफेंसिव शील्ड तैयार कर ली है। उन्होंने देश के रक्षा उद्योग की तारीफ करते हुए कहा कि लगातार जारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने अपनी आक्रामक और निवारक क्षमताओं में काफी ज्यादा प्रगति कर ली है और देश किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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