अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी, ट्रंप ने कहा आर्थिक दबाव के बाद ही होगी पूरी बातचीत

Sushma Kumari10 August 20263 min read126 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी, ट्रंप ने कहा आर्थिक दबाव के बाद ही होगी पूरी बातचीत

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 9 अगस्त 2026 को यह साफ कर दिया कि ईरान पर जब तक आर्थिक दबाव और ज्यादा नहीं बढ़ता, तब तक वॉशिंगटन तेहरान के साथ केवल आंशिक बातचीत यानी semi-negotiating ही कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका प्रशासन इस मामले में कम ही दखल दे रहा है और वे चाहते हैं कि ईरान पर भारी महंगाई और पैसों की कमी जैसी आर्थिक मुश्किलें खुद असर डालें। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में तेल की कीमतें गिरने से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कुछ कम हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है, जिसका असर खाड़ी देशों के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों और यात्रा करने वालों पर भी पड़ सकता है।

ईरान की मांगें और विदेश मंत्री का बयान

दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने भी 9 अगस्त को अपना रुख साफ करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की औपचारिक बातचीत तभी संभव है जब वॉशिंगटन हाल ही में साइन किए गए एक समझौते यानी Memorandum of Understanding का उल्लंघन करना बंद करे। ईरान की सरकार ने कढ़ी शर्तें रखी हैं जिनमें उनके बंदरगाहों पर लगी रोक को हटाना, तेल प्रतिबंधों को खत्म करना, क्षेत्र से अमेरिकी सेना को वापस बुलाना, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करना और जमे हुए पैसों को वापस देना शामिल है। ईरान का यह भी कहना है कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को दोबारा नहीं खोला जाएगा। आपको बता दें कि इस जलडमरूमध्य में ट्रैफिक को लेकर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच एक समझौता पिछले कई दिनों से पेंडिंग चल रहा है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का बड़ा फैसला

एक अन्य घटनाक्रम में, इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 9 अगस्त को अपनी कैबिनेट की बैठक के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार किए गए गाजा के 15 सूत्रीय शांति समझौते को औपचारिक रूप से ठुकरा दिया। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ शब्दों में कहा कि इज़राइल इस 15 सूत्रीय दस्तावेज को नहीं मानता और उन्होंने यह भी पक्का किया कि जब तक हमास के पास मौजूद सभी हथियार पूरी तरह से सरेंडर नहीं हो जाते और हमास का खात्मा नहीं होता, तब तक इज़राइली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने बहुत कड़े शब्दों में यह भी घोषणा की कि जब तक वे प्रधानमंत्री पद पर हैं, तब तक किसी भी हालत में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश नहीं बनेगा।

शांति योजना का इतिहास और अमेरिका की प्रतिक्रिया

याद दिला दें कि यह पूरा विवाद उस व्यापक शांति योजना के करीब एक साल बाद सामने आया है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले 29 सितंबर 2025 को घोषित किया था और फिर 9 अक्टूबर 2025 को इस पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस प्लान में तुरंत युद्ध रोकने, बंधकों की वापसी, कैदी अदला-बदली, गाजा को हथियारों से मुक्त करने, एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात करने, फिलिस्तीनी तकनीकविदों द्वारा अंतरिम शासन चलाने और बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण करने की बात कही गई थी। हमास ने एक बार फिर इस शांति योजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि इज़राइल के वित्त मंत्री Bezalel Smotrich ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस सख्त फैसले का पूरा समर्थन किया है। इस बीच, एक्सिओस से बात करने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका नेतन्याहू के इस रुख से बिल्कुल परेशान नहीं है, क्योंकि वे समझते हैं कि उनकी अपनी राजनीतिक जरूरतें क्या हैं, बशर्ते वे गाजा में हमलों को रोकने में सहयोग करते रहें।

Share:

Comments

Leave a comment