अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- हालात बिल्कुल ठीक और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर हमारा पूरा कंट्रोल

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि ईरान के साथ हालात 'बिल्कुल ठीक' चल रहे हैं और होर्मुज जलडमरू मध्य यानी Strait of Hormuz पर पूरी तरह से अमेरिका का नियंत्रण है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उस क्षेत्र पर सिर्फ अमेरिका का हक है और किसी और का नहीं, साथ ही उन्होंने अपनी नौसेना यानी US Navy की जमकर तारीफ की है।
पुराने समझौते और युद्धविराम का टूटना
अगर हम इस पूरे विवाद की पीछे की कहानी को समझें तो 18 June की रात को तेहरान और वाशिंगटन के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते का मकसद 28 February से चले आ रहे टकराव को खत्म करना था। लेकिन यह शांति ज्यादा लंबी नहीं चल पाई और 8 July को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान कर दिया कि अब वह युद्धविराम लागू नहीं है। इसके बाद से दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया और बयानों का दौर शुरू हो गया। 12 July को हमलों का एक और दौर देखने को मिला जिसके बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए घोषणा की थी कि जब तक इस क्षेत्र में अमेरिका का दखल बंद नहीं होता, तब तक स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को पूरी तरह से बंद रखा जाएगा।
अमेरिका की सख्ती और आर्थिक दबाव की रणनीति
ईरान की इस घोषणा के ठीक अगले दिन यानी 13 July को अमेरिकी राष्ट्रपति ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका खुद स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज का संरक्षक बनेगा। इसके साथ ही अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकेबंदी को फिर से लागू कर दिया ताकि ईरान पर शिकंजा कसा जा सके। हाल ही में यानी रविवार को Donald Trump ने यह भी स्वीकार किया कि उनके प्रशासन ने ईरान के साथ किसी भी समझौते की कोशिशों को फिलहाल कम कर दिया है और इस प्रक्रिया को धीमा कर दिया गया है। अमेरिकी सरकार को यह उम्मीद है कि ईरान पर लगातार बनाए जा रहे आर्थिक दबाव का असर आने वाले समय में जरूर दिखाई देगा। इसी बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को ईरान पर भरोसा करने वाला आखिरी व्यक्ति बताया है जिससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास की भारी कमी है।