अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बताया अपना क्षेत्र, ईरान ने दी कड़ी चेतावनी और अमेरिकी प्रतिबंधों का किया विरोध।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिससे दुनिया भर में हलचल मच गई है। 21 अगस्त 2026 को दक्षिण कैरोलिना में एक चुनावी रैली के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि इस पूरे इलाके पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और ईरान को बहुत बुरी तरह से हरा दिया गया है। इस बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
ईरान का तीखा जवाब और क्षेत्रीय तनाव
ट्रंप के इस बयान पर ईरान की सरकार ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़म गरीबाबादी ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक भ्रम है और यह जलमार्ग हमेशा से ईरान का रहा है और आगे भी ईरान का ही रहेगा। इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि अमेरिका की तरफ से दी जा रही आर्थिक धमकियां पूरी तरह से फेल होने वाली हैं। वहीं दूसरी तरफ ईरान के सैन्य चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दोल्लाही ने चेतावनी दी कि अगर कोई नया खतरा पैदा किया गया, तो उसका बहुत खतरनाक जवाब दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि वे समुद्री नियमों को अपने तरीके से देखेंगे और किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आएंगे।
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई और शिपिंग पर असर
दूसरी तरफ अमेरिकी सेना यानी CENTCOM ने 21 अगस्त को रिपोर्ट दी कि उनके पास 20 से ज्यादा युद्धपोत हैं, जिनकी मदद से उन्होंने 68 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया है, 3 जहाजों को बेकार कर दिया है और नाकेबंदी लागू करने के लिए 2 अन्य जहाजों पर चढ़कर जांच की है। इस अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला जहाजों का आना-जाना युद्ध से पहले के मुकाबले करीब 90 प्रतिशत कम हो गया है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने भी ऐलान किया है कि अमेरिका आने वाले सोमवार को ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और ओमान की भूमिका
इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बीच कानूनों को लेकर भी बड़ा मतभेद बना हुआ है। अमेरिका का मानना है कि इस जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून लागू होता है, जबकि ईरान 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन को नहीं मानता है, हालांकि उसने इस पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की थी। ईरान अपनी सुरक्षा के लिए जहाजों को रोकने और नियमों को तय करने की बात पर अड़ा हुआ है। इस बीच चीन ने ईरान से आने वाले तेल के आयात में कमी कर दी है और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि बात आगे न बढ़े। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने ओमान के साथ इस रास्ते पर आने-जाने को लेकर चल रही बातचीत की पुष्टि भी की है।