Turkey और Israel के बीच सीरिया में बढ़ा तनाव, भारी सैन्य वाहनों के साथ बॉर्डर पर हलचल तेज।

Praggya Singh sabal22 August 20263 min read74 viewsWorld
Turkey और Israel के बीच सीरिया में बढ़ा तनाव, भारी सैन्य वाहनों के साथ बॉर्डर पर हलचल तेज।

सीरिया में इन दिनों हालात काफी गंभीर बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में मिली जानकारी के अनुसार, सीरिया में तुर्की की तरफ से भारी सैन्य तैनाती देखने को मिली है, जहां लगभग 200 से 250 बख्तरबंद गाड़ियां और 20 टैंक देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। यह पूरी हलचल ऐसे समय में सामने आई है जब कुछ दिन पहले यानी 18 अगस्त 2026 को अबू अल-दुहूर एयरबेस पर इजरायली हवाई हमले हुए थे, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में अचानक से गर्मी आ गई है।

इजरायल और तुर्की के बीच कूटनीतिक तनाव

इस पूरे मामले पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद इस बात की पुष्टि की थी कि यह सैन्य कार्रवाई उनके द्वारा की गई थी। उनका कहना था कि यह कदम उठाना इसलिए जरूरी था ताकि तुर्की की सैन्य मौजूदगी को रोका जा सके, जिससे इजरायल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी और पुराने समझौतों का उल्लंघन हो रहा था। वहीं दूसरी तरफ, इजरायली रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैप एरडोगन पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह क्षेत्र में खतरनाक एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले को अंजाम देने से पहले इजरायल ने अमेरिका को अपनी मंशा के बारे में पूरी जानकारी दे दी थी।

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तुर्की और सीरिया का आधिकारिक बयान

दूसरी तरफ, तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि अबू अल-दुहूर सुविधा पर उनकी कोई भी स्थायी सैन्य मौजूदगी नहीं है। अंकारा ने इजरायल के उन दावों को भी बेबुनियाद बताया जिनमें पहले से सैन्य जमावड़े की बात कही जा रही थी। तुर्की ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की बात कही है। तुर्की के अधिकारियों का साफ कहना है कि सीरिया में उनका दखल सिर्फ सीरियाई सैन्य क्षमता और वहां के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में मदद करने तक ही सीमित है।

इसके अलावा, सीरिया के विदेश मंत्री أسअद अल-शाइबानी ने भी तुर्की के किसी भी नए सैन्य बेस बनाने की बात को गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस एयरबेस को सिर्फ सीरियाई वायु सेना के लिए फिर से तैयार किया जा रहा है। अल-शाइबानी ने यह भी कंफर्म किया कि तुर्की के अधिकारी सैन्य सहयोग और ट्रेनिंग के सिलसिले में इस जगह पर आ चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस बेस पर चल रहे कामों की पूरी जानकारी हमले से पहले ही इजरायल को दे दी गई थी।

रणनीतिक बदलाव और हथियारों की आपूर्ति

मौजूदा हालात बताते हैं कि तुर्की सीरिया में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा हुआ है और भारी मात्रा में हथियारों की अदला-बदली कर रहा है। हाल ही में इस बात की पुष्टि हुई है कि सीरियाई सेना को ओटोकार कोबरा और कैडिलैक गेज कमांडो जैसे बख्तरबंद वाहन सौंपे गए हैं। इन हथियारों को हाल ही में अलेप्पो में 76वीं डिवीजन के पासिंग आउट परेड के दौरान भी देखा गया था। विश्लेषकों का मानना है कि यह सब इजरायल की तरफ से तुर्की के बढ़ते प्रभाव को रोकने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है, क्योंकि अंकारा लगातार सीरिया की वायु सेना को फिर से खड़ा करने और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम बनाने में मदद कर रहा है। इसके साथ ही ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि सीरियाई प्रशासन ने तुर्की के साथ मिलकर देश में नए सैन्य एयरबेस बनाने के विकल्पों पर चर्चा की है, जो भविष्य में रूसी मौजूदगी की जगह ले सकते हैं।

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