रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक.

Sushma Kumari12 August 20263 min read68 viewsWorld
रूस-यूक्रेन युद्ध पर तुर्की की बड़ी चेतावनी, बढ़ता संघर्ष मॉस्को को पहुंचा सकता है आखिरी विकल्प तक.

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भयानक युद्ध को लेकर तुर्किए (Turkey) के विदेश मंत्री हाकान फिदान (Hakan Fidan) ने एक बहुत ही गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि यह तबाही मचाने वाला युद्ध और अधिक आगे बढ़ता है, तो रूस अपने पास मौजूद आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह मजबूर हो सकता है। तुर्किए के विदेश मंत्री ने पूरी दुनिया के देशों से अपील की है कि वे इस लड़ाई को और ज्यादा फैलने से रोकने के लिए तुरंत बड़े कदम उठाएं ताकि स्थिति को संभाला जा सके।

अनादोलू एजेंसी के कार्यक्रम में हुआ बड़ा खुलासा

तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलू (Anadolu) के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान बातचीत करते हुए हाकान फिदान से यह सवाल किया गया था कि क्या मौजूदा हालात रूस को उसके अंतिम विकल्प की तरफ धकेल सकते हैं। इस सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि संघर्ष जिस तरह से लगातार बढ़ रहा है, उससे मॉस्को के सामने ऐसी स्थिति बन सकती है जहां उसे अपने सबसे कड़े और अंतिम विकल्प का इस्तेमाल करना पड़े। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिमी देश भी इस खतरे की बात से पूरी तरह वाकिफ हैं और उन्होंने खुद पश्चिमी देशों के सामने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

फिदान ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिन बातों के बारे में पहले यह सोचा गया था कि ऐसा कभी नहीं होगा, आज वही सब कुछ असलियत में होता हुआ नजर आ रहा है। यह लड़ाई अब केवल कुछ सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह अपने तय लक्ष्यों और तरीकों के मामले में लगातार बहुत बड़े इलाके में फैलती जा रही है। युद्ध का असर अब सीधे तौर पर आम नागरिकों की बस्तियों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच चुका है, जो कि एक बहुत डरावनी बात है।

मध्यस्थ देशों और अमेरिका का क्या है आकलन

तुर्किए के मंत्री के अनुसार, अमेरिका समेत तमाम मध्यस्थ देशों का यह मानना है कि जब तक रूस और यूक्रेन दोनों के पास एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए भरपूर सैन्य ताकत बची हुई है, तब तक दोनों में से कोई भी पक्ष झुकने या रियायत देने के लिए तैयार नहीं होगा। जब तक दोनों देश किसी बीच का रास्ता निकालने के लिए राजी नहीं होते, तब तक शांति की बात आगे बढ़ाना बहुत मुश्किल काम है। ऐसा लग रहा है कि दोनों देश एक-दूसरे को पूरी तरह थका देना चाहते हैं और उसके बाद ही वे बातचीत की मेज पर बैठने के बारे में सोचेंगे।

फिदान ने इस लंबी लड़ाई को फ्रंटलाइन पर घिसने वाला युद्ध बताया है, जहां मोर्चे पर तैनात सैनिकों को लगातार ड्रोन और तोपखाने के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। युद्ध के मैदान में लगातार भारी मात्रा में पैसा और नए सैनिक झोंके जा रहे हैं। पहले जब तुर्किए ने बीच में पड़कर समझौते की कोशिश की थी, तब कुछ उम्मीद बधि थी, लेकिन जमीन पर कब्जे के विवाद के कारण बात पूरी नहीं हो सकी। अब हालात यह हैं कि नुकसान केवल मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि पीछे के शहरों और आम लोगों तक पहुंच गया है, जिससे किसी देश के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।

Share:

Comments

Leave a comment