UAE में ADNOC के जहाजों पर फिर हुआ हमला, हार्मोनज जलडमरूमध्य में एक हफ्ते में तीन जहाज बने निशाना.

Sushma Kumari15 August 20262 min read55 viewsUAE
UAE में ADNOC के जहाजों पर फिर हुआ हमला, हार्मोनज जलडमरूमध्य में एक हफ्ते में तीन जहाज बने निशाना.

संयुक्त अरब अमीरात UAE ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय नीतियों से पीछे नहीं हटेगा चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं। 14 अगस्त 2026 को ADNOC यानी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के एक और जहाज को उस समय निशाना बनाया गया जब वह हार्मोनज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था। एक हफ्ते के भीतर इस तरह की यह तीसरी घटना है जिससे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है। हालांकि इस बार की घटना में किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है लेकिन इससे पहले अगस्त के शुरुआती दिनों में भी कई हमले हुए थे। फरवरी से लेकर अब तक कुल 15 जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है जिनमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और 20 लोग घायल हो गए थे। UAE सरकार ने इन लगातार हो रही समुद्री हमलों के लिए सीधे तौर पर Iran और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को जिम्मेदार ठहराया है।

डॉ. अनवर गर्गश का बड़ा बयान और कूटनीतिक रुख

UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार Dr. Anwar Gargash ने जोर देकर कहा कि इस तरह के उकसावे देश को उसके रणनीतिक रास्ते से बिल्कुल नहीं डिगा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की नीति कूटनीति, प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित है। गर्गश ने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्रीय संप्रभुता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी खाड़ी देशों को एक साथ आना होगा। UAE सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव Resolution 2817 का खुला उल्लंघन बताया है जो कमर्शियल जहाजों के रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश देता है।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर मंडराता खतरा

पूरी दुनिया की नजरें इस समय हार्मोनज जलडमरूमध्य पर टिकी हुई हैं क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस महत्वपूर्ण रास्ते पर लगातार हमले होने से वैश्विक स्तर पर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। UAE लगातार यह मांग कर रहा है कि इन हमलों को तुरंत रोका जाए और अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक के लिए इस जलमार्ग को बिना किसी शर्त के फिर से खोला जाए। इस हालात का असर उन तमाम कामगारों और प्रवासियों पर भी पड़ रहा है जो खाड़ी देशों में रहकर अपनी रोजी-रोटी कमा रहे हैं और अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।

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