गाजा में इजरायल की कार्रवाई पर भड़के अरब देश, यूएई समेत कई देशों ने जारी किया सख्त बयान

Praggya Singh sabal6 August 20262 min read63 viewsUAE
गाजा में इजरायल की कार्रवाई पर भड़के अरब देश, यूएई समेत कई देशों ने जारी किया सख्त बयान

गाजा में चल रहे संघर्ष और वहां हो रही घटनाओं को लेकर यूएई (UAE) सहित कई देशों ने अपनी गहरी चिंता जताई है। 6 अगस्त 2026 को यूएई, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें गाजा में इजरायल द्वारा किए जा रहे उल्लंघनों की कड़ी निंदा की गई है। इन देशों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।

नागरिक सुरक्षा और मानवीय सहायता पर जोर

विदेश मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि इजरायल की ये कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ हैं। बयान में बताया गया कि आम नागरिकों, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, का लगातार नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, युद्ध के कारण पैदा हुए हालातों ने शांति प्रक्रिया को भी खतरे में डाल दिया है। मंत्रियों ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फिलिस्तीनी गुटों के रोडमैप स्वीकार करने की घोषणा के बाद, ये हमले शांति वार्ता के दूसरे चरण को पटरी से उतार सकते हैं और मानवीय संकट को और गहरा कर सकते हैं। इन देशों ने मांग की है कि गाजा के सभी हिस्सों में बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता पहुंचाई जाए और चिकित्सा कर्मियों व सुविधाओं को सुरक्षित रखा जाए।

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वेस्ट बैंक और यरूशलेम पर भी चिंता

सिर्फ गाजा ही नहीं, बल्कि मंत्रियों ने वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अवैध बस्तियों के विस्तार और यरूशलेम की स्थिति बदलने वाली एकतरफा कार्रवाइयों को फिलिस्तीनी अधिकारों के खिलाफ बताया। इन देशों के अनुसार, यह सब फिलिस्तीन और इजरायल के बीच दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) को खत्म करने की एक सोची-समझी कोशिश है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जवाबदेही की मांग

अंत में, इन देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से यूएन सुरक्षा परिषद (UN Security Council) से अपील की है कि वे अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने मांग की है कि इजरायल को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 का पालन करने के लिए मजबूर किया जाए। साथ ही, इन गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया गया है। क्षेत्र के इन देशों का मानना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दखल नहीं दिया गया, तो इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है और शांति की संभावना खत्म हो जाएगी।

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