Gaza में जारी हमलों पर UAE समेत 8 देशों ने जताया कड़ा विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

Sushma Kumari6 August 20262 min read53 viewsUAE
Gaza में जारी हमलों पर UAE समेत 8 देशों ने जताया कड़ा विरोध, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

गाजा पट्टी में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर खाड़ी देशों ने अपनी चिंता जाहिर की है। UAE, Qatar, Jordan, Indonesia, Pakistan, Turkey, Saudi Arabia और Egypt ने संयुक्त रूप से एक कड़ा बयान जारी कर इन हमलों की कड़ी निंदा की है। यह आधिकारिक बयान 5 और 6 अगस्त 2026 के दौरान सामने आया, जिसमें इन आठ देशों ने साफ कहा कि गाजा में जो कुछ हो रहा है, वह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।

हमलों के पीछे का सच और गंभीर चिंताएं

विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया है कि गाजा में अस्पतालों, स्वास्थ्य सुविधाओं और आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी चीजों को निशाना बनाया जा रहा है। इन हमलों में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों सहित कई आम लोगों की जान गई है। UAE के विदेश मंत्रालय और अन्य देशों के साझा बयानों में यह कहा गया है कि ये हरकतें अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इजरायल की जिम्मेदारियों को दरकिनार करती हैं। यह सब तब हो रहा है जब क्षेत्र में शांति बहाली के लिए कोशिशें की जा रही हैं और संघर्ष को खत्म करने की योजना पर बात चल रही है।

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शांति प्रक्रिया को हो रहा नुकसान

इन आठ देशों का मानना है कि इजरायल की यह नीति न केवल क्षेत्रीय शांति को बिगाड़ रही है, बल्कि उस सीजफायर प्लान को भी कमजोर कर रही है जिसे पहले फलस्तीनी गुटों ने स्वीकार किया था और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसकी घोषणा की थी। इन देशों ने चेताया है कि अगर यह सिलसिला नहीं रुका, तो गाजा में मानवीय संकट और भी गहरा हो जाएगा। इसके अलावा, इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने इजरायल से तुरंत सैन्य कार्रवाई बंद करने और सीजफायर के वादों का सम्मान करने की मांग की है।

वेस्ट बैंक और यरुशलम पर भी असर

केवल गाजा ही नहीं, बल्कि इन देशों ने चिंता जताई है कि इजरायल की यह नीति पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है। इसमें वेस्ट बैंक में अवैध बसावट, वहां हो रहे हमले और पूर्वी यरुशलम के स्टेटस में एकतरफा बदलाव शामिल हैं। इन तमाम मुद्दों को जोड़कर देखा जाए, तो यह साफ है कि ये कदम दो-राष्ट्र समाधान यानी 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' की संभावनाओं को खत्म करने का काम कर रहे हैं। ये देश लगातार दिसंबर 2025 और फरवरी 2026 से ही अपनी यही राय और चिंता दुनिया के सामने रखते आए हैं।

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