UAE Cyber Security Warning: यूएई में हर 50 में से 1 बच्चा डिजिटल पहचान चोरी का शिकार, नया कानून लागू.

यूएई साइबर सिक्योरिटी काउंसिल ने एक बहुत बड़ी चेतावनी जारी की है जिसमें कहा गया है कि देश में हर 50 में से 1 बच्चा डिजिटल पहचान चोरी यानी डिजिटल आइडेंटिटी थेफ्ट के खतरे की चपेट में है। जैसे-जैसे नए शैक्षणिक वर्ष के लिए छात्र स्कूलों में वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं, वैसे-वैसे देश के अधिकारी परिवारों से अपील कर रहे हैं कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल हाइजीन को सबसे पहले रखें। इस चेतावनी के आने के बाद अभिभावकों की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि बच्चे आजकल इंटरनेट और स्मार्टफोन का इस्तेमाल पढ़ाई और मनोरंजन दोनों के लिए बहुत ज्यादा कर रहे हैं। काउंसिल का साफ कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और सही नियमों का पालन करके बच्चों को इस बड़े ऑनलाइन खतरे से आसानी से बचाया जा सकता है ताकि वे सुरक्षित माहौल में अपनी पढ़ाई लिखाई पूरी कर सकें।
बच्चों के लिए कड़े सुरक्षा उपाय और पासवर्ड की जरूरत
अधिकारियों ने स्कूलों जाने वाले बच्चों के लिए कुछ जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है। छात्रों को मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करने, टू-स्टेप वेरिफिकेशन को एक्टिव रखने और किसी भी अनजान मैसेज या लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले की पहचान अच्छी तरह जांचने के लिए कहा गया है ताकि फिशिंग हमलों से बचा जा सके। इसके अलावा उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे समय-समय पर अपने फोन और लैपटॉप की प्राइवेसी सेटिंग चेक करें, डिवाइस को अपडेट रखें, उन ऐप को तुरंत डिलीट कर दें जिनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है और सुरक्षा सॉफ्टवेयर को केवल भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों से ही डाउनलोड करें। ये छोटी-छोटी बातें बच्चों को ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी जैसी गंभीर समस्याओं से दूर रखने में बहुत मदद करती हैं।
कड़े कानूनी नियम और सोशल मीडिया पर उम्र की पाबंदी
बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रखने के लिए यूएई सरकार ने एक बहुत मजबूत कानूनी ढांचा तैयार किया है। संघीय डिक्री-कानून संख्या 26 वर्ष 2025, जिसे चाइल्ड डिजिटल सेफ्टी लॉ के नाम से जाना जाता है, के तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों का व्यक्तिगत डेटा माता-पिता की सहमति के बिना इकट्ठा करने या इस्तेमाल करने पर पूरी पाबंदी लगाई गई है। इसके साथ ही इस डेटा का इस्तेमाल टारगेटेड कमर्शियल विज्ञापन के लिए करने पर भी रोक है। इस नियम को और मजबूत बनाते हुए कैबिनेट रेजोल्यूशन नंबर 106 ऑफ 2026 के जरिए यूएई में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की न्यूनतम उम्र 15 साल तय कर दी गई है। इसके तहत छोटे बच्चे अब पर्सनल अकाउंट नहीं चला सकेंगे और न ही सोशल मीडिया के सभी फीचर्स का इस्तेमाल कर पाएंगे। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक यूएई कानून वेबसाइट पर जा सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों की राय और माता-पिता की जिम्मेदारी
कानूनी जानकारों का मानना है कि इन नए नियमों के आने से डिजिटल सुरक्षा अब केवल एक सामान्य सलाह नहीं रह गई है बल्कि यह एक औपचारिक कानूनी जिम्मेदारी बन गई है। बीएसए लॉ की टीएमटी एसोसिएट मरीना एल हाचेम ने बताया कि अब देखभाल करने वालों यानी माता-पिता और अभिभावकों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और किसी भी हानिकारक कंटेंट की तुरंत अधिकारियों को रिपोर्ट करें। प्रूफपॉइंट के क्षेत्रीय प्रमुख केनान अबू लताफ ने यह भी जोड़ा कि आज के समय में आधुनिक खतरे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके घोटालों को बहुत बड़े पैमाने पर अंजाम दे रहे हैं, जो इंसानी व्यवहार और पर्सनल डेटा का गलत फायदा उठाते हैं।
माता-पिता को यह बात अच्छी तरह याद रखनी चाहिए कि फेडरल लॉ नंबर 3 ऑफ 2016 यानी वादीमा कानून के तहत बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने की पूरी कानूनी जिम्मेदारी अभिभावकों की ही होती है। अगर इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बरती जाती है तो इसके लिए भारी जुर्माना या जेल की सजा भी हो सकती है। इसके अलावा साइबर क्राइम लॉ के तहत साइबरबुलिंग यानी ऑनलाइन किसी को परेशान करने पर न्यूनतम 250,000 दिरहम तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यूएई में रहने वाले सभी प्रवासी परिवारों और नागरिकों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे इन कानूनों को समझें और अपने बच्चों को सुरक्षित रखें।