यूएई राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गश का बड़ा बयान, ईरान के हमलों से खुद तेहरान की स्थिति हुई कमजोर.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार Dr. Anwar Gargash ने 25 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान के लगातार हमले से खुद तेहरान की स्थिति कमजोर हुई है। ईरान की इस आक्रामक नीति ने उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर दिया है और उसकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गर्गश ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के इन हमलों का कोई भी रणनीतिक फायदा नहीं मिला है और यह एक गलत फैसला साबित हुआ है।
खाड़ी देशों में तनाव और कूटनीतिक प्रयास
यूएई के अधिकारी ने साफ किया है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता का रास्ता हिंसा से होकर नहीं गुजरता है। उन्होंने ईरान से अपील की है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर काम करे ताकि तनाव को कम किया जा सके और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक नए और संवेदनशील दौर में पहुंच गया है। आर्थिक दबाव भी काफी बढ़ गया है और पुराने कूटनीतिक समझौतों की समय सीमा भी खत्म हो चुकी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कमर्शियल शिपिंग पर असर
अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के चल रहे संघर्ष के तीसरे हफ्ते में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। स्थिति यह है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है। 15 अगस्त 2026 को यूएई ने आधिकारिक तौर पर एक ADNOC से जुड़े पोत पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी। इसके साथ ही तुरंत हमले रोकने और इस अहम जलमार्ग को पूरी तरह से खोलने की मांग की गई थी। गर्गश ने संकेत दिया है कि यूएई इस रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने पर विचार कर रहा है, क्योंकि व्यापार और ऊर्जा की निर्बाध सप्लाई दुनिया भर के लिए जरूरी है।
पुराना विवाद और कड़े प्रतिबंध
साल की शुरुआत से ही दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता रहा है। 1 मार्च 2026 को यूएई ने औपचारिक चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमले नहीं रुके, तो उसे अपनी सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। इसके बाद यूएई की जमीन पर सीधे हमले हुए, जिसके चलते 1 अप्रैल 2026 से एक नया ट्रैवल बैन लागू कर दिया गया। इस नियम के तहत ईरानी नागरिकों के देश में आने या प्रमुख एयरलाइंस के जरिए यहां से गुजरने पर रोक लगा दी गई है। इसी बीच, बदलती राजनीतिक स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भी तेहरान पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं।