UAE और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, मिसाइल हमले के आरोपों के बाद यूएई ने उठाया बड़ा कदम

खाड़ी देशों में क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिससे वहां रहने वाले आम लोगों और प्रवासियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने हाल ही में 1953 के तख्तापलट की बरसी पर विदेशी दखलंदाजी के खिलाफ बहुत कड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 1953 का वह ऐतिहासिक दौर अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा ईरानी जनता की इच्छा और उनके आत्मनिर्णय के अधिकार पर सीधा हमला था। उन्होंने इसे उपनिवेशवाद का स्पष्ट मामला बताया और कहा कि ईरान आज किसी भी आधुनिक दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है और देश अपना भविष्य खुद तय करता है।
क्षेत्रीय तनाव और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज का मुद्दा
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरानी अधिकारी ने हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हार्मुज को नया अमेरिकी क्षेत्र बताया था। ईरान का साफ कहना है कि इस जलडमरूमध्य का खुलना और बंद होना पूरी तरह से उनके नियंत्रण में है और वे इस तरह के किसी भी दावे को सही नहीं मानेंगे। ईरान के इन बयानों से साफ पता चलता है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी देशों के साथ उनका टकराव और ज्यादा गहरा हो सकता है, जिसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ सकता है।
यूएई और ईरान के बीच बढ़ता गतिरोध
दूसरी तरफ, खाड़ी देशों के लिए भी स्थिति काफी संवेदनशील हो गई है। ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने 19 अगस्त 2026 को खाड़ी देशों को चेतावनी दी थी कि यदि किसी भी देश ने अमेरिकी सेना को सहायता पहुंचाई, तो उसे अमेरिकी अभियानों में सीधी भागीदारी माना जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई जब 18 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने आरोप लगाया कि ईरान ने उनके क्षेत्र में दो बैलिस्टिक मिसाइल दागी हैं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने इन मिसाइल हमलों के सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इन्हें बेबुनियाद बताया।
यूएई का कड़ा फैसला और व्यापार पर असर
इस कथित मिसाइल घटना के बाद UAE सरकार ने तुरंत प्रभाव से बड़ा कदम उठाया। यूएई ने 18 अगस्त 2026 को ईरान के साथ अपने सभी प्रकार के व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन को अगले आदेश तक के लिए पूरी तरह से निलंबित करने की घोषणा कर दी। इस अचानक उठाए गए कदम से खाड़ी देशों में व्यापार करने वाले व्यापारियों और वहां काम करने वाले प्रवासियों के मन में भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। जो लोग इन देशों में रहकर अपने परिवारों का पेट पालते हैं, वे इस बढ़ते तनाव को लेकर काफी डरे हुए हैं कि कहीं इसका असर उनकी रोजी-रोटी पर न पड़े।