UAE के प्रवासियों के लिए राहत, भारत के 180 दिन वाले नए ओवरसीज फंड नियम से मिली छूट.

भारत के रिजर्व बैंक यानी RBI ने विदेशी निवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया है जिसके तहत 180-day overseas funds rule लाया गया है। इस नियम के आने से भारत में रहने वाले लोगों के लिए विदेशी मुद्रा को लेकर कुछ पाबंदियां तय की गई हैं लेकिन संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में रहने वाले भारतीय प्रवासियों यानी NRIs के लिए इसमें बड़ी राहत दी गई है।
क्या है भारत का 180 दिन वाला ओवरसीज फंड नियम
भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 2022 में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी LRS के नियमों को बदलते हुए यह नया नियम शुरू किया था। इस नियम के मुताबिक भारत का कोई भी नागरिक जो विदेशी मुद्रा हासिल करता है और उसका इस्तेमाल नहीं करता है, उसे उस पैसे को 180 दिन के भीतर या तो भारत वापस लाना होता है या सरेंडर करना पड़ता है। यह नियम फेमा यानी Foreign Exchange Management Act (FEMA), 1999 की धारा 8 और साल 2015 के नियमों के तहत आता है। इस कानून के मुताबिक केवल विदेश के बैंक खाते में पैसा रख लेना या फिक्स डिपॉजिट यानी FD बना देना काफी नहीं माना जाता है।
इसके बाद 28 नवंबर 2025 को आरबीआई की तरफ से एक गाइडलाइन आई जिसमें यह साफ किया गया कि जो लोग पहले भारत के बाहर रहते थे और वहां संपत्ति, शेयर या विदेशी मुद्रा कमाई थी, वे उसे अपने पास रख सकते हैं। इसके बाद 10 से 11 अगस्त 2026 के बीच आए ताज़ा स्पष्टीकरण में यह साफ कर दिया गया कि यह 180 दिन वाला नियम UAE में रहने वाले प्रवासियों यानी एनआरआई पर लागू नहीं होता है।
UAE के प्रवासियों पर क्यों नहीं लागू होता यह नियम
यूएई में रहने वाले भारतीय नागरिक जो अपनी सैलरी, बिजनेस का पैसा या अन्य बचत वहां के बैंकों में रखते हैं, उन्हें इस 180 दिन की पाबंदी से पूरी तरह बाहर रखा गया है। यह नियम केवल उन लोगों के लिए है जो भारत के अंदर रहते हैं। जानकारों के मुताबिक, इस नियम की वजह से भारत में रहने वाले अमीर लोगों को ज्यूरिख और सिंगापुर जैसे वित्तीय केंद्रों में इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड मिलने या रिन्यू होने में दिक्कत आ रही है क्योंकि विदेशी बैंक डिप्लॉयमेंट की शर्त को लेकर थोड़ा सतर्क हो गए हैं।
लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के तहत भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम $250,000 यानी ढाई लाख डॉलर विदेश भेज सकता है। इस पैसे का इस्तेमाल यात्रा, पढ़ाई या निवेश के लिए किया जाता है। अगर यह पैसा तय समय में इस्तेमाल नहीं होता है, तो इसे 180 दिनों के भीतर भारत वापस लाना जरूरी होता है। लेकिन यूएई के एनआरआई की वहां की कमाई इस दायरे से बाहर है। इसके अलावा एनआरओ यानी Non-Resident Ordinary खातों से होने वाले रेमिटेंस के नियम भी अलग हैं, जहां एक वित्तीय वर्ष में $1 मिलियन यानी दस लाख डॉलर तक की राशि भेजी जा सकती है और वह स्वतः इस 180 दिन के नियम के अधीन नहीं आते हैं।