UAE पर ईरान का हमला, হরমুজ जलडमरूमध्य में ADNOC के जहाजों को बनाया निशाना, यूएई सरकार ने बताया इसे सरासर डकैती

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में एक बड़ा बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे ADNOC यानी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। अधिकारियों ने बताया कि मध्य अगस्त 2026 से इस अहम समुद्री रास्ते पर कई टैंकरों को निशाना बनाया गया है, जिसके बाद यूएई ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की इन हरकतों को खुलेआम समुद्री डकैती करार दिया है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी आप MoFA की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।
समुद्री सुरक्षा पर मंडराते इन खतरों के बीच फरवरी के बाद से अब तक 15 ऐसे जहाजों को निशाना बनाया जा चुका है जो एADNOC से जुड़े हुए थे। इन लगातार हमलों की वजह से एक व्यक्ति की जान चली गई है और करीब 20 नाविक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस बात की पुष्टि ANI News की रिपोर्ट में भी की गई है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और नौकरीपेशा प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और यूएई की चेतावनी
यूएई सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि इस तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन है। यह प्रस्ताव साफ तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री नेविगेशन की सुरक्षा करने और कमर्शियल शिपिंग के रास्तों में किसी भी तरह की रुकावट को पूरी तरह खारिज करता है। आधिकारिक बयानों में यह बात सामने आई है कि होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल आर्थिक दबाव बनाने के लिए करना क्षेत्रीय स्थिरता और ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी के लिए बहुत बड़ा खतरा बन चुका है। इस बारे में अधिक जानकारी यहाँ पढ़ी जा सकती है।
बहरीन और मिस्र का मिला समर्थन
इस मुश्किल वक्त में बहरीन और मिस्र जैसे देश यूएई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। इन सभी देशों ने इन हमलों की एक स्वर में निंदा की है और तुरंत इन पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के फिर से खोला जाना चाहिए ताकि नाविकों की सुरक्षा और ग्लोबल ट्रेड यानी वैश्विक व्यापार में किसी भी प्रकार की रुकावट न आए। इस बारे में पूरी बात इस रिपोर्ट में साझा की गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासी इन हालातों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर क्षेत्रीय शांति और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।