UAE का बड़ा बयान, अमेरिका द्वारा सीरिया को आतंकवाद की सूची से हटाने के फैसले का किया स्वागत

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अमेरिका के एक ऐतिहासिक फैसले का आधिकारिक तौर पर समर्थन किया है, जिसके तहत सीरिया को आतंकवाद के राज्य प्रायोजकों की सूची से हमेशा के लिए हटा दिया गया है। यह बड़ा बदलाव 24 अगस्त 2026 को पूरी तरह लागू हुआ, जो 45 दिन की कांग्रेस समीक्षा प्रक्रिया के बाद समाप्त हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 8 जुलाई 2026 को इसकी औपचारिक शुरुआत की गई थी, जिससे करीब 47 साल पुराना प्रतिबंध अब खत्म हो गया है।
यूएई के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम सीरिया देश में स्थिरता और खुशहाली लाने के लिए एक बहुत सकारात्मक शुरुआत है। इस फैसले से सीरिया में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वहां के आम नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य का रास्ता साफ होगा। इस बारे में अधिक जानकारी UAE Ministry of Foreign Affairs की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।
आतंकवाद की सूची से बाहर हुआ सीरिया
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि यह कदम सीरियाई सरकार द्वारा उठाए गए सकारात्मक कदमों को देखते हुए उठाया गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति अहमद अल-शारा की सरकार ने देश को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से दूर रखने का संकल्प लिया है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अल-नुसरा फ्रंट को भी विशेष वैश्विक आतंकवादी संगठन की सूची से हटा दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई के बारे में विस्तार से US Department of the Treasury के पोर्टल पर देखा जा सकता है।
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने इस फैसले को देश के युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया है। सीरिया के विदेश मंत्री अद अस-शैबानी और वित्त मंत्री मोहम्मद बर्निह ने भी इसे सीरियाई कूटनीति की एक बड़ी सफलता माना है। इस प्रतिबंध के हटने से सीरियाई वित्तीय संस्थान फिर से दुनिया के पेमेंट नेटवर्क SWIFT से जुड़ सकेंगे, जिससे पैसों के लेन-देन का खर्च कम होगा और रुका हुआ धन वापस आ सकेगा।
यूएई और सीरिया के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्ते
यह कूटनीतिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब यूएई और सीरिया के बीच गैर-तेल द्विपक्षीय व्यापार में 132% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल यह व्यापार बढ़कर 1.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसके अलावा दोनों देशों ने अगस्त 2026 की शुरुआत में एक संयुक्त व्यापार परिषद को फिर से सक्रिय किया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर, विमानन और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर नजर रखेगी। इसमें एमार जैसी बड़ी कंपनियों द्वारा 12 अरब डॉलर तक के संभावित निवेश शामिल हैं। इस बारे में पूरी रिपोर्ट WAM News Agency पर उपलब्ध कराई गई है।