UK, Australia और Canada ने इजरायल के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, राहतकर्मियों पर हमले की जांच बंद करने पर जताई कड़ी नाराजगी.

ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने मिलकर इजरायल के उस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है जिसमें 2024 में हुए वर्ल्ड सेंट्रल किचन यानी WCK के सहायता काफिला हमले की आपराधिक जांच से इनकार कर दिया गया था। इन तीनों देशों की सरकारों ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को एक साझा बयान जारी करते हुए इस फैसले को पूरी तरह से शर्मनाक करार दिया है। इस दुखद घटना में सात मानवीय सहायता कर्मियों की मौत हो गई थी, जिनमें तीन ब्रिटिश नागरिक जॉन चैपमैन, जेम्स हेंडरसन और जेम्स किर्बी शामिल थे। इसके अलावा ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ज़ोमी फ्रैंककॉम, एक अमेरिकी-कहानियाई दोहरी नागरिकता वाली महिला, पोलिश नागरिक डैमियन सोबोल और एक फिलिस्तीनी कार्यकर्ता की भी जान चली गई थी।
पीड़ितों के परिवारों को चाहिए न्याय
तीनों प्रमुख देशों ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि इजरायली सेना द्वारा 19 अगस्त 2026 को की गई घोषणा बहुत कम और बहुत देर से उठाई गई बात है। उनका साफ कहना था कि इस हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों को असली न्याय और जवाबदेही मिलनी चाहिए। यह बयान ऐसे समय पर सामने आया जब दुनिया भर में वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन डे मनाया जा रहा था, जिससे स्थिति और भी अधिक संवेदनशील और गंभीर हो गई। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कैनबरा में इजरायली राजदूत हिलेल न्यूमैन को तलब किया और अपनी नाराजगी सीधे तौर पर दर्ज कराई। वहीं दूसरी ओर, ब्रिटिश विदेश कार्यालय ने कहा कि वह पीड़ित परिवारों की ओर से बेहद गुस्से में हैं और इस मामले में पूरी गंभीरता से जवाब मांग रहे हैं।
राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर बढ़ रहा दबाव
ब्रिटेन के मध्य पूर्व मामलों के मंत्री स्टीफन डौल्टी ने पुष्टि की है कि उनका देश इजरायली अधिकारियों से लगातार जरूरी जवाब हासिल करने के लिए प्रयास कर रहा है। पोलैंड के विदेश मंत्रालय ने भी इस फैसले पर गहरी निराशा जताई है और मांग की है कि इजरायल उनके देश की चल रही जांच में पूरा सहयोग करे। पोलैंड ने भी वॉरसॉ में इजरायली राजदूत को अपने यहां बुलाया। वर्ल्ड सेंट्रल किचन ने एक बार फिर से एक स्वतंत्र आयोग के गठन की अपनी पुरानी मांग को दोहराया है और साफ कहा है कि इजरायल डिफेंस फोर्सेस यानी IDF अपने ही मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक UK Government Joint Statement पर जा सकते हैं।
इजरायली सेना का पक्ष और अंतरराष्ट्रीय कानून
दूसरी तरफ, इजरायली सेना यानी IDF ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि वाहनों में हमास के लड़ाकों की मौजूदगी को लेकर आकलन प्रक्रिया में कुछ गलतियां जरूर हुई थीं, लेकिन कमांडरों के कदम किसी भी तरह से आपराधिक सीमा को पार नहीं करते हैं। इन सबके बीच, सहयोगी देशों ने इजरायल से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि संघर्ष वाले इलाकों में काम कर रहे मानवीय सहायता कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।