Ukraine: यूक्रेन ने दक्षिण कोरिया से मांगा एयर डिफेंस सिस्टम, रूस के हमलों से बचने के लिए लगाई गुहार

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने दक्षिण कोरिया से एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की अपील की है। रूस की ओर से लगातार किए जा रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच कीव को हवाई सुरक्षा के मामले में बाहरी मदद की सख्त जरूरत महसूस हो रही है। इस संबंध में उन्होंने यूक्रेनी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में खुलकर बात की और दक्षिण कोरिया से रक्षा सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया है।
रूस और उत्तर कोरिया की बढ़ती नजदीकियों पर चिंता
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने अपनी बात रखते हुए कहा कि दक्षिण कोरिया के पास यूक्रेन के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने के लिए बहुत ठोस वजह मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य रिश्ते तेजी से बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, साल 2024 में उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए लगभग 14,000 से 15,000 सैनिक यूक्रेन के खिलाफ युद्ध क्षेत्र में भेजे थे। इसके अलावा प्योंगयांग सरकार रूसी इलाके में भविष्य में 30,000 से 50,000 अतिरिक्त सैनिकों को तैनात करने की पूरी तैयारी कर रही है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में उन्होंने कोई आधिकारिक या अतिरिक्त सबूत सार्वजनिक नहीं किया है।
एशियाई देशों के लिए भविष्य का बड़ा खतरा
यूक्रेनी राष्ट्रपति का मानना है कि उत्तर कोरियाई सेना यूक्रेन के इस मौजूदा युद्ध से आधुनिक युद्ध लड़ने का अमूल्य अनुभव हासिल कर रही है। उनका कहना है कि आने वाले समय में यदि प्रशांत क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और एशियाई देशों के सामने किसी तरह का बड़ा संकट पैदा होता है, तो उत्तर कोरिया रूस के साथ इस युद्ध से मिले तजुर्बे का इस्तेमाल करेगा। इसके बदले में उत्तर कोरिया रूस से लगातार सैन्य तकनीक और आधुनिक उपकरण हासिल करता रहेगा। इसी को देखते हुए यूक्रेन ने दक्षिण कोरिया के साथ ड्रोन समझौतों और अन्य रक्षा क्षेत्रों में मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
हथियार निर्यात पर दक्षिण कोरिया के कड़े कानून
विशेषज्ञों का यह मानना है कि दक्षिण कोरिया द्वारा सीधे तौर पर यूक्रेन को हथियार मुहैया कराने की संभावना फिलहाल बहुत सीमित नजर आती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि दक्षिण कोरिया के मौजूदा नियम और कानून सक्रिय युद्ध वाले क्षेत्रों में हथियारों के निर्यात को लेकर बेहद सख्त पाबंदियां लगाते हैं। खुद राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने भी इस कानूनी चुनौती का खुलकर जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के राजनयिक इस अहम मुद्दे पर लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं और यूक्रेन को पूरी उम्मीद है कि कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा। रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम बनाने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और तकनीक को साझा करने के रास्ते अभी भी खुले रह सकते हैं।
अन्य देशों से सहयोग की तलाश में यूक्रेन
यूक्रेन लंबे वक्त से अपने सभी सहयोगी देशों से मिसाइल इंटरसेप्टर और एयर डिफेंस सिस्टम की कमी को पूरा करने की गुहार लगा रहा है। इससे पहले ज़ेलेंस्की ने जापान के समर्थन को लेकर भी बात की थी और कहा था कि टोक्यो से जैसी उम्मीद थी, उनका समर्थन उतना मजबूत नहीं रहा। इसके बावजूद यूक्रेन जापान के साथ भी अपने रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने की लगातार कोशिश कर रहा है। पिछले दिनों ज़ेलेंस्की ने जापानी कंपनी मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज के साथ सहयोग दिखाने में रुचि जताई थी, क्योंकि इस कंपनी के पास पैट्रियट मिसाइलों के निर्माण का आधिकारिक लाइसेंस है। अमेरिकी राजनीति में बदलाव और डोनाल्ड ट्रंप के रुख के बाद उपजी अनिश्चितता के कारण अब यूक्रेन दक्षिण कोरिया समेत एशिया के बाकी देशों के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग के नए विकल्प तलाशने में जुट गया है।