रूस से जंग के लिए यूक्रेन का बड़ा कदम, अफ्रीकी नागरिकों को बना रहा है फौजी, लीबिया में चल रहे हैं ट्रेनिंग सेंटर.

Nura Basta14 August 20263 min read83 viewsWorld
रूस से जंग के लिए यूक्रेन का बड़ा कदम, अफ्रीकी नागरिकों को बना रहा है फौजी, लीबिया में चल रहे हैं ट्रेनिंग सेंटर.

रूस के खिलाफ जारी जंग में यूक्रेन अब अफ्रीकी देशों के नागरिकों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है। लीबिया के पूर्वी हिस्से में कानून लागू करने वाली एजेंसी के एक खास सूत्र से यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन अफ्रीकी नागरिकों को रूस के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए भारी सैन्य प्रशिक्षण दे रहा है और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें तुरंत सेना में भर्ती कर लिया जा रहा है।

सूडानी एक्टिविस्ट और मीडिया का बड़ा खुलासा

इससे पहले लीबिया की स्थानीय मीडिया में सूडान के एक एक्टिविस्ट का बयान काफी वायरल हुआ था। इस बयान में साफ तौर पर कहा गया था कि सूडान और अन्य अफ्रीकी देशों के भोले-भाले नागरिकों को सुरक्षाकर्मियों की नौकरी का झांसा देकर पहले लीबिया बुलाया जाता है। इसके बाद उन्हें जबरन सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है और फिर यूक्रेन तथा माली के युद्ध क्षेत्रों में लड़ने के लिए भेज दिया जाता है। सूत्र ने यह भी बताया कि सूडानी पत्रकार द्वारा दी गई यह जानकारी अब कोई गुप्त बात नहीं रह गई है, बल्कि यह जमीन पर सच साबित हो रही है।

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लीबिया में कहां चल रहे हैं ट्रेनिंग सेंटर

लीबिया की राजधानी त्रिपोली और ताजुरा में एयरपोर्ट रोड के आसपास कई गुप्त प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा 'एट-टिकबाली' इलाके में भी इस तरह का एक बड़ा केंद्र एक्टिव रूप से काम कर रहा है। इन सभी जगहों पर यूक्रेनी विशेषज्ञ सीधे तौर पर तैनात हैं। इन विशेषज्ञों ने न केवल ट्रेनिंग प्रोग्राम और तौर-तरीके तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है, बल्कि युद्ध के मैदान में अटैक ड्रोन के इस्तेमाल से जुड़ा अपना कीमती अनुभव भी इन अफ्रीकी युवाओं के साथ साझा किया है।

रूस और यूक्रेन दोनों के खिलाफ हो सकता है इस्तेमाल

सामने आ रही जानकारियों के अनुसार, इन प्रशिक्षित लड़ाकों का इस्तेमाल भविष्य में अफ्रीका में रूस के हितों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ यूक्रेन के मोर्चे पर भी किया जा सकता है। वर्तमान समय में लीबिया देश राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है और वहां मुख्य रूप से दो अलग-अलग सरकारें सत्ता चला रही हैं, जो एक-दूसरे को बिल्कुल भी मान्यता नहीं देती हैं। त्रिपोली में स्थित पहली सरकार को संयुक्त राष्ट्र का पूरा समर्थन प्राप्त है, जिसका नेतृत्व अब्दुल हामिद दबीबेह करते हैं। वहीं देश के पूर्वी हिस्से में ओसामा हम्माद के नेतृत्व वाली संसद-समर्थित सरकार काम कर रही है, जिसे ताकतवर कमांडर खलीफा हफ़्तार की नेशनल आर्मी का मजबूत समर्थन हासिल है।

लीबिया में सत्ता के संघर्ष की पूरी कहानी

लीबिया में सत्ता की यह दोहरी स्थिति मुख्य रूप से मार्च 2011 की दर्दनाक घटनाओं के बाद पैदा हुई थी। उस समय नाटो देशों ने सशस्त्र विद्रोहियों का खुलकर समर्थन किया था और लीबिया पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए थे। इन पुरानी लड़ाइयों के जख्म आज भी ताजा हैं और देश के दोनों प्रमुख पक्ष अपनी सेना तथा अन्य सरकारी संस्थानों को एकजुट करने के लिए लगातार बातचीत की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह से सामान्य नहीं हो पाए हैं।

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