West Bank Violence: वेस्ट बैंक में हिंसा और अवैध बस्तियों के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक नेताओं ने जताई गहरी चिंता.

Occupied West Bank में हिंसा और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है और आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में वेस्ट बैंक के अलग-अलग हिस्सों में कई हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए 23 August 2026 तक की स्थिति पर United Nations Human Rights Office ने कड़ी चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में हिंसा और जमीन पर कब्जे की कोशिशें अपनी सीमा पार कर चुकी हैं। UN Deputy Special Coordinator for the Middle East Peace Process, Ramiz Alakbarov ने बताया कि यह क्षेत्र अब पूरी तरह से एक बड़े संकट की कगार पर खड़ा है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने भी औपचारिक रूप से इस बात की अपील की है कि सभी तरह की नई बस्तियों के निर्माण की योजनाओं को तुरंत रोका जाए।
इससे पहले 20 August 2026 को दुनिया के कई बड़े देशों के नेताओं ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया था। इस साझा बयान में यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, कनाडा, नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, स्वीडन, बेल्जियम, स्पेन, ऑस्ट्रिया, ग्रीस, साइप्रस और यूरोपीय आयोग के नेता शामिल थे। इन सभी नेताओं ने मिलकर E1 क्षेत्र में 1,234 housing units के निर्माण के लिए टेंडर जारी करने के फैसले को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। UK Government Official Statement के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत इस तरह की बस्तियां अवैध हैं और इनसे दो-राष्ट्र समाधान को बड़ा खतरा पैदा हो रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष Ursula von der Leyen ने भी इस पूरी योजना की कड़ी आलोचना की है।
जमीनी हालात और स्थानीय स्तर पर बढ़ती हिंसा
वेस्ट बैंक में पिछले कुछ दिनों के दौरान कई हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। साउथ हेब्रोन हिल्स इलाके में दो किशोरों द्वारा एक दिव्यांग व्यक्ति पर हमले का मामला सामने आया, जबकि अल-रकीज में एक बुजुर्ग और लाचार व्यक्ति को बुरी तरह पीटा गया। कुस्रा इलाके में फलस्तीनी परिवारों के घरों को उग्रवादियों द्वारा एक हफ्ते तक घेरे में रखे जाने की खबर है, जिसके बाद इजरायली रक्षा बलों (IDF) को वहां पहुंचकर अवैध ढांचों को हटाने के लिए कदम उठाने पड़े। इसके अलावा जेनिन, तुबास और अरबाबा में भी कई लोगों के घायल होने की सूचना मिली है। ओसारिन गांव में हमलावरों ने एक वाहन और एक कमरे को आग के हवाले कर दिया और दीवारों पर नस्लीय नारे लिख दिए। बेथलेहम शहर में भी पानी की पाइपलाइनों को तोड़ दिया गया और पेड़ों को उखाड़ फेंका गया।
इन तमाम घटनाओं के बीच लगातार सैन्य कार्रवाइयों के चलते कम से कम 13 से 14 फलस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एक बच्चा भी शामिल है। शनिवार को अल-राम, तुबास और तायासिर में गोलीबारी और दम घुटने की वजह से कुल 14 फलस्तीनी घायल हो गए। इसके साथ ही बेइता, टेल, बीट दाजान, तुलकारेम और कलकिलिया जैसे इलाकों में भी लगातार सैन्य छापे मारे जा रहे हैं। नूर शम्स शरणार्थी शिविर में एक मस्जिद की मीनार पर इजरायली झंडा फहराए जाने की भी बात सामने आई है।
क्षेत्रीय नेताओं की कूटनीतिक बैठकें और कृषि क्षेत्र पर संकट
बढ़ते तनाव के बीच मिस्र के विदेश मंत्री Badr Abdelatty ने फलस्तीनी उपराष्ट्रपति Hussein Al Sheikh के साथ मिलकर इस पूरी हिंसा और अल-अक्सा मस्जिद के पास लगाए जा रहे प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। दूसरी ओर, तुबास के अतौफ इलाके में कृषि संबंधी गतिविधियों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। बुनियादी ढांचे के नष्ट हो जाने की वजह से स्थानीय किसानों को महीनों से पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसे विशेषज्ञ इस क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से कमजोर करने की एक सोची-समझी चाल मान रहे हैं। फलस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध का स्वागत किया है और इस पूरी योजना को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है। फलस्तीनी दीवार और बस्ती प्रतिरोध आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, अब वेस्ट बैंक के करीब 42% हिस्से पर नियंत्रण हो चुका है, जहां लगभग 780,000 लोग बस्तियों और अवैध चौकियों में रह रहे हैं।