Yemen Crisis: यूएन के विशेष दूत ने दी चेतावनी, हूती हमलों से यमन में टूट सकती है शांति और खतरे में पड़ी आम लोगों की जान.

यमन में चल रहे संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र यानी UN के विशेष दूत Hans Grundberg ने गंभीर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि हालिया हमलों की वजह से एक बार फिर से बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। 10 अगस्त 2026 को दिए गए बयान में उन्होंने बताया कि इन हमलों की वजह से मोखा, मा'रिब और दूसरे इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की जान को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अप्रैल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद से यमन में हालात इतने ज्यादा खराब कभी नहीं देखे गए थे, जितने अब हो रहे हैं।
हूती हमलों से हुआ भारी नुकसान
हाल के दिनों में हूती विद्रोहियों की तरफ से मिसाइल और ड्रोन से हमले बहुत ज्यादा बढ़ा दिए गए हैं। 10 अगस्त को मोखा पोर्ट और उसके आस-पास के रिहायशी इलाकों में हुए हमलों में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 4 सैनिक और 3 आम नागरिक शामिल थे। इसके अलावा इन हमलों में करीब 30 लोग घायल भी हुए, जिनमें ज्यादातर आम लोग ही थे। हालांकि यमन की सरकारी सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 11 ड्रोन्स को हवा में ही रोक लिया और उन्हें तबाह कर दिया। इससे पहले 8 अगस्त को मा'रिब प्रांत में हुए मिसाइल हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत की खबर सामने आई थी, जिससे यह साफ हो गया कि आने वाले दिनों में खतरा और ज्यादा बढ़ सकता है।
शांति बनाए रखने की अपील
विशेष दूत ने 7 अगस्त को भी मा'रिब और हद्रमौत में बढ़ते हमलों के साथ-साथ कमर्शियल शिपिंग यानी व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर चेतावनी जारी की थी। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की है कि वे संयम बरतें और शांति बनाए रखने के लिए राजनीतिक बातचीत का रास्ता अपनाएं ताकि इस संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आम जनता और जरूरी इमारतों की सुरक्षा करना सबसे ज्यादा जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही कार्रवाई
सुरक्षा परिषद ने इस मामले में कदम उठाते हुए 14 जुलाई 2026 को रिजोल्यूशन 2826 पास किया था, जिसके तहत रेड सी में व्यापारी जहाजों पर होने वाले हमलों को लेकर हर महीने की रिपोर्ट महासचिव को सौंपनी होगी और यह नियम 15 जनवरी 2027 तक लागू रहेगा। इसके अलावा अमेरिका ने भी हूती हमलों का मुकाबला करने के लिए यमन की सरकार को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है, जिसमें मुख्य रूप से समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान शामिल हैं।