यमन में हूती हमलों पर UN और EU का सख्त रुख, सऊदी अरब पर मिसाइल हमले की निंदा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) और यूरोपीय संघ (EU) ने यमन में लगातार बढ़ते तनाव और हूती मिलिशिया द्वारा किए जा रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है। हाल के दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब और यमन में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन हमलों को क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा करार दिया है।
हमलों का सिलसिला और अंतरराष्ट्रीय निंदा
सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने 13 जुलाई से सऊदी अरब और 22 जुलाई से वाणिज्यिक जहाजों पर हूती मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है। इसके अलावा, 3 जुलाई को साना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 13 जुलाई को होदेइदाह हवाई अड्डे पर बिना अनुमति के विमान उतारने को अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है। सुरक्षा परिषद ने स्पष्ट किया है कि यमन के सभी हवाई अड्डों पर किसी भी उड़ान के लिए यमन सरकार से पूर्व समन्वय और मंजूरी लेना अनिवार्य है।
यूरोपीय संघ ने भी ब्रुसेल्स से एक आधिकारिक बयान जारी कर सऊदी अरब के नजरान (Najran) क्षेत्र और यमन के मारिब (Marib) में नागरिक सुविधाओं पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में आलोचना की है। यूरोपीय संघ के प्रवक्ता ने कहा कि नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इन हमलों से क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल पैदा हो रहा है, जो शांति प्रयासों के लिए बाधा बन रहा है।
सुरक्षा परिषद की चेतावनी और शांति का प्रयास
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने रेज़ोल्यूशन 2216 (Resolution 2216) का हवाला देते हुए याद दिलाया कि किसी भी प्रतिबंधित समूह, जिसमें हूती भी शामिल हैं, को हथियार और सैन्य सहायता देना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। परिषद ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने यमन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय शांति को नुकसान पहुंचाते हैं।
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg यमन में राजनीतिक समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने उनके प्रयासों को पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिया है ताकि एक व्यापक, यमन-नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। इन हमलों का सीधा असर क्षेत्र में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की आम जनता पर पड़ रहा है, जो पहले से ही संघर्ष से जूझ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अब यह सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं कि मानवीय और नागरिक जरूरतों के लिए सुरक्षित हवाई मार्ग हमेशा खुले रहें और किसी भी प्रकार का सैन्य उल्लंघन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बने।