अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किया 'Economic D-Day' का ऐलान, गल्फ देशों और चीन पर भी पड़ेगा बड़ा असर

Praggya Singh sabal24 August 20262 min read57 viewsWorld
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किया 'Economic D-Day' का ऐलान, गल्फ देशों और चीन पर भी पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई का ऐलान कर दिया है। इस बड़े कदम को अमेरिका की तरफ से 'Economic D-Day' का नाम दिया गया है, जिसका सीधा मकसद ईरान सरकार की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह से तोड़ना है। इस संबंध में उन्होंने फाइनेंशियल टाइम्स में एक लेख लिखा और साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 24 अगस्त 2026 को अपनी बात रखी। अमेरिकी प्रशासन का यह साफ कहना है कि ईरान को तब तक पूरी दुनिया से अलग-थलग रखा जाएगा जब तक वह अकेला नहीं पड़ जाता और जो भी देश ईरान की मदद करेगा उसे भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव

अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उन्होंने पहले ही ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया है और उसकी लगभग 100 प्रतिशत मिलिट्री फैक्ट्रियों को तबाह कर दिया है। इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी रोक लगाने की बात कही गई है जिससे यह साफ होता है कि अमेरिका अब तेहरान के साथ इस मामले में आखिरी दौर की लड़ाई लड़ रहा है। इस पूरी योजना की और भी विस्तृत जानकारी और नए प्रतिबंधों का ऐलान 24 अगस्त 2026 को दोपहर 14:00 बजे ET यानी भारतीय समयानुसार शाम को एक विशेष कॉन्फ्रेंस में किया जाना तय हुआ है। इस बारे में अधिक जानकारी White House की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देखी जा सकती है।

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ईरान की कड़ी चेतावनी और गल्फ देशों की मुश्किलें

अमेरिका के इस ऐलान के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने में अमेरिका का साथ देगा, उसे ईरान का दुश्मन माना जाएगा और इस कदम को युद्ध की कार्रवाई समझा जाएगा। उन्होंने यह भी धमकी दी है कि अगर यह आर्थिक युद्ध बंद नहीं हुआ तो फारस की खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी जाएगी। इससे पहले जून महीने में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की तरफ से एक समझौता हुआ था जो अब टूट चुका है।

इस पूरे घटनाक्रम से मध्य पूर्व में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा लगाए गए नेवल नाकेबंदी और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। इन नए और कड़े प्रतिबंधों का सीधा असर चीन और कई गल्फ देशों पर पड़ने की पूरी संभावना है, जो अब एक तरफ अमेरिका के वित्तीय दबाव और दूसरी तरफ ईरान की धमकियों के बीच फंसते हुए नजर आ रहे हैं। इस संकट का असर वहां रहने वाले प्रवासियों और कामगारों पर भी पड़ सकता है जो अक्सर इन हालात पर अपनी नजर रखते हैं।

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