US का बड़ा ऐलान, ईरान की सरकार गिराने के लिए लगाएगी इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाने का पूरा मन बना लिया है। US Treasury Secretary Scott Bessent ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को यह ऐलान किया कि अमेरिका ईरान सरकार को पूरी तरह से गिराने के लिए इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इस नए कदम से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है और आम लोगों के बीच भी इसकी चर्चा जोरों पर है। अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच पिछले लगभग छह महीनों से तनाव का माहौल बना हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिकी प्रशासन की इस नई रणनीति को एक 'वन-टू पंच' यानी दोतरफा हमला बताया जा रहा है। इसमें गंभीर आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ देश की नौकायन और समुद्री नाकाबंदी को भी शामिल किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने दुनिया के अन्य देशों और ग्लोबल सहयोगियों से इस मुहिम में साथ देने की अपील की है। साफ शब्दों में कहा गया है कि देशों को यह तय करना होगा कि वे इस मामले में या तो अमेरिका के साथ हैं या फिर उसके खिलाफ हैं। इस पूरी जानकारी के बारे में ANI News की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है।
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बुधवार, 19 अगस्त 2026 को सोशल प्लेटफॉर्म Truth Social के जरिए ईरान के खिलाफ 'ECONOMIC D-DAY' का ऐलान किया था। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि जो भी वित्तीय संस्थान, कंपनी, एयरपोर्ट या सरकारी निकाय ईरान को किसी भी तरह का सहारा या आर्थिक जीवन रेखा देगा, उसे भयंकर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। इसे किसी भी देश के खिलाफ की जाने वाली अब तक की सबसे क्रूर आर्थिक कार्रवाई बताया गया है।
चीन और अन्य देशों पर पड़ी सकती नजर
अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent आने वाले सोमवार, 24 अगस्त 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इस दौरान वे इस पूरे आर्थिक पैकेज की पूरी और विस्तृत जानकारी साझा करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस अधिकतम आर्थिक दबाव के चलते भविष्य में बड़े स्तर पर सैन्य अभियानों की जरूरत शायद कम पड़े। अमेरिकी प्रशासन की नजरें विशेष रूप से चीन पर टिकी हुई हैं, क्योंकि चीन ने अकेले साल 2025 में ईरान के कुल समुद्री तेल का 80% से अधिक हिस्सा खरीदा था। अमेरिकी वित्त मंत्री ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि चीन के बड़े संस्थान अमेरिकी नीतियों के अनुसार नहीं चलते हैं, तो राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली व्हाइट हाउस यात्रा से पहले उन पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
ईरान का कड़ा रुख और प्रतिक्रिया
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका की इन तमाम धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे अमेरिका की असफल नीतियों का ही एक हिस्सा बताया है, जिसका मकसद केवल देश के भीतर की आर्थिक समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाना है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन अमेरिकी कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करते हुए इन्हें 'आर्थिक आतंकवाद' और 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है। गौर करने वाली बात यह है कि इसी साल अप्रैल और जून के महीनों में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम को लेकर बातचीत हुई थी, जो कि बीच में ही रुक गई थी।