मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, तैनात किए गए दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर.

मध्य पूर्व में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी ताकत को बढ़ाते हुए क्षेत्र में USS George Washington और USS George H.W. Bush नामक दो बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात कर दिए हैं। इस सैन्य तैनाती को लेकर अब दुनिया भर में नौसेना की तैयारी और उसकी क्षमता को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी Vice Admiral John Miller ने एक इंटरव्यू में बताया कि हालांकि यह तैनाती बहुत बड़ी सैन्य ताकत को दिखाती है, लेकिन इसकी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है क्योंकि दुनिया के दूसरे हिस्सों में जहाजों की कमी हो रही है।
अमेरिकी नौसेना की लंबी तैनाती और रणनीतिक चुनौतियां
तारीख 25 अगस्त 2026 तक, USS Abraham Lincoln ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के इलाके से अपनी लंबी ड्यूटी पूरी कर ली है। यह आधुनिक समय के कैरियर इतिहास में सबसे लंबी यानी 277 दिनों की तैनाती में से एक थी। अब यह जहाज हिंद महासागर में यूएस पैसिफिक कमांड के तहत काम कर रहा है। इस लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर काम करने वाले नाविकों की स्थिति और खाने-पीने के सामान को लेकर आंतरिक रिपोर्टें भी सामने आईं, जिन्हें राष्ट्रपति Donald Trump और Admiral Brad Cooper ने खारिज करते हुए इस कठिन समय में जहाज के शानदार काम की तारीफ की है।
व्यापारिक जहाजों पर रोक और रक्षा मंत्री का बयान
क्षेत्र में समुद्री हालात अभी भी काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी के तहत अब तक 71 कमर्शियल जहाजों के रास्ते बदले गए हैं। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने साफ किया है कि अमेरिकी सेना इस घेराबंदी को अनिश्चितकाल तक जारी रख सकती है। हालांकि इसके लिए रसद से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है क्योंकि मध्य पूर्व के बंदरगाहों पर खतरों के कारण सपोर्ट जहाजों को सामान पहुंचाने के लिए हजारों मील की दूरी तय करनी पड़ी है।
संसद में उठी चिंता और ईरान की प्रतिक्रिया
इन सभी ऑपरेशनल मांगों को देखकर अमेरिकी संसद में भी चिंता जताई जाने लगी है। सीनेटर Richard Blumenthal ने रक्षा सचिव Pete Hegseth को एक पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह से जहाजों की तैनाती बढ़ाना और उनका रोटेशन करना भविष्य की तैयारियों से समझौता करने जैसा है, जिससे आने वाले समय में बड़ी नाकामी का सामना करना पड़ सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी Richard Blumenthal Official Letter पर देखी जा सकती है। दूसरी तरफ, ईरानी अधिकारियों ने भी सख्त तेवर दिखाए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ताओं ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। इसके अलावा, देश के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने दावा किया है कि उनके पास इन प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए दो साल की खास रणनीति तैयार है।