US CENTCOM का बड़ा ऐलान, मिडिल ईस्ट में सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाई नई ड्रोन यूनिट.

Nura Basta13 August 20262 min read58 viewsWorld
US CENTCOM का बड़ा ऐलान, मिडिल ईस्ट में सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाई नई ड्रोन यूनिट.

अमेरिका के सेंट्रल कमांड यानी U.S. CENTCOM ने मध्य पूर्व में सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था को और ज्यादा मजबूत करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। 13 अगस्त 2026 को एक आधिकारिक घोषणा के तहत नई मल्टी-डोमेन और बहुराष्ट्रीय यूनिट Task Force Falcon Strike के गठन का ऐलान किया गया है। इस नई टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य हवा, जमीन और समुद्र के अंदरूनी हिस्सों में एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन्स यानी वन-वे अटैक ड्रोन्स का प्रभावी इस्तेमाल करना है ताकि क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे से पूरी मुस्तैदी के साथ निपटा जा सके।

टास्क फोर्स फाल्कन स्ट्राइक का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

इस नई यूनिट के जरिए अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के सैन्य जवान मिलकर काम करेंगे और मानव रहित प्रणालियों यानी अनमैंड सिस्टम्स का इस्तेमाल करेंगे। इस पहल का मकसद क्षेत्र में डिफेंस को मजबूत करना और मिलिट्री की क्षमता को बढ़ाना है। इस पूरी यूनिट का नेतृत्व U.S. Special Operations Command Central (SOCCENT) के स्टाफ द्वारा किया जा रहा है। इसका दायरा CENTCOM के कुल 21 देशों के कार्यक्षेत्र में फैला हुआ है, जिसके तहत सहयोगी देशों के साथ मिलकर ड्रोन युद्ध की क्षमताओं को और अधिक व्यापक रूप दिया जा रहा है।

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Task Force Scorpion Strike की सफलता पर आधारित है नया कदम

आपको बता दें कि यह नई टास्क फोर्स इससे पहले बनाई गई Task Force Scorpion Strike की उत्तराधिकारी है। पुरानी यूनिट को दिसंबर 2025 में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के पहले डेडीकेटेड वन-वे अटैक ड्रोन स्क्वाड्रन के रूप में स्थापित किया गया था। CENTCOM के कमांडर Admiral Brad Cooper के अनुसार, यह नई यूनिट अपनी पुरानी यूनिट की सफलताओं को आगे बढ़ाएगी और क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच नए और आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देगी।

फिलहाल यह टास्क फोर्स क्षेत्र के कई देशों और साझीदारों को इस यूनिट में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रही है। इसका मुख्य लक्ष्य एक मजबूत और साझा रक्षा ढांचा तैयार करना है, जिससे आने वाले समय में आधुनिक ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके किसी भी स्थिति से तेजी से निपटा जा सके और रणनीतिक रूप से लचीलापन बनाए रखा जा सके। इस कदम से खाड़ी देशों में सुरक्षा का दायरा और अधिक व्यापक होने की उम्मीद है।

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