US Central Command: अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बनाई नई टास्क फोर्स, ड्रोन हमलों से निपटने के लिए शुरू हुआ फॉल्कन स्ट्राइक अभियान

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। 13 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर एक नई बहुराष्ट्रीय और मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जिसे Task Force Falcon Strike नाम दिया गया है। यह नई यूनिट विशेष रूप से वन-वे अटैक ड्रोन्स यानी आत्मघाती ड्रोन्स से निपटने और हवा, सतह तथा पानी के अंदर यानी सब-सरफेस वातावरण में मानव रहित प्रणालियों को आपस में जोड़ने के लिए बनाई गई है। इस नई फोर्स की कमान U.S. Special Operations Command Central (SOCCENT) के हाथों में होगी और इसके जरिए क्षेत्रीय सहयोगियों को भी इस सुरक्षा घेरे में शामिल किया जा रहा है, जिन्हें आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया जा चुका है।
Task Force Scorpion Strike की सफलता के बाद उठाया गया कदम
यह नई टास्क फोर्स इससे पहले बनाई गई Task Force Scorpion Strike की उत्तराधिकारी है, जिसे ठीक नौ महीने पहले शुरू किया गया था। पुरानी यूनिट ने मानवरहित प्रणालियों के इस्तेमाल और एकीकरण में एक नया मार्ग प्रशस्त किया था, जिसमें Low-cost Uncrewed Combat Attack System (LUCAS) ड्रोन्स का उपयोग भी शामिल था। CENTCOM के कमांडर Admiral Brad Cooper ने जानकारी दी कि यह नई फोर्स अपनी पुरानी यूनिट की सफलताओं और इनोवेशन को आधार बनाकर सामूहिक सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाएगी। इस नई व्यवस्था से मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके साझीदार देशों की रक्षा तैयारियां और अधिक मजबूत होंगी।
ड्रोन और नेवी के जहाजों का तालमेल
इस नई टास्क फोर्स को बनाने के पीछे पिछले मिशनों से मिला जमीनी और सामरिक अनुभव बहुत काम आया है। इसमें नौसेना के युद्धपोतों से एरियल ड्रोन लॉन्च करने और सामरिक अभियानों में मानवरहित जहाजों का उपयोग करने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन सभी मानवरहित हवाई और समुद्री क्षमताओं को एक साथ जोड़कर अमेरिका क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को सुधारना चाहता है और आधुनिक सैन्य तकनीक को तेजी से लागू करना चाहता है। मध्य पूर्व के देशों में लगातार बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच इस तरह की तकनीक का विस्तार होना आम जनता और वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए भी एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।