Dollar हुआ कमजोर, ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर खत्म होने से खाड़ी देशों में तनाव बढ़ा

18 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर में भारी कमजोरी देखने को मिली, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60-दिन का सीजफायर समझौता आखिरकार समाप्त हो गया। इस शांति समझौते की शुरुआत 17 जून को हुई थी, लेकिन तय समय सीमा के भीतर कोई भी स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका। इसके बाद एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने ऐलान किया कि तेहरान अब पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपनाएगा। साथ ही, अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तोड़ने के लिए सटीक और समय पर हमले करने की धमकी भी दी गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस ceasefire को आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया है और चेतावनी दी है कि यदि ओमान की खाड़ी में कोई बाधा डाली गई, तो अमेरिका स्थिति से बहुत आसानी से निपट लेगा।
ओमान की खाड़ी में हुआ हमला और UKMTO की रिपोर्ट
उसी दिन यानी 18 अगस्त को यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने एक बड़ी घटना की जानकारी दी। हॉर्मूज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल यानी वस्तु से हमला किया गया। इस हमले के कारण जहाज के इंजन रूम को काफी नुकसान पहुंचा और एक क्रू मेंबर के हताहत होने की खबर भी सामने आई है। फिलहाल ओमान का तटरक्षक बल यानी Omani Coast Guard इस प्रभावित जहाज को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। इस पूरी घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं, खासकर उन भारतीय प्रवासियों के बीच जो समुद्री परिवहन या लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कूटनीतिक प्रयास और क्षेत्रीय नेताओं की प्रतिक्रिया
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी दूत Jared Kushner ने बताया कि वाशिंगटन की तरफ से ईरान के साथ लगातार बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि बातचीत का माहौल सकारात्मक और मजबूत है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तेहरान ने अभी तक किसी भी समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। दूसरी ओर, तुर्की के राष्ट्रपति Tayyip Erdogan ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में तनाव को कम करने की दिशा में काम करें। तुर्की ने एक बार फिर से नए सिरे से शांति प्रयासों को शुरू कराने के लिए अपनी तरफ से पूरा समर्थन देने की पेशकश की है।
इराक में सुरक्षा कार्रवाई और ईरान का आंतरिक कदम
यह पूरा तनाव ऐसे समय में बढ़ रहा है जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी IRGC पर आरोप है कि वह इस साल 28 फरवरी को हुए अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद से ही लगातार क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों के साथ मिलकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। हाल ही में इराक की काउंटर आतंकवाद सेवा यानी CTS ने ईरान समर्थित समूह 'हरकत हिजबुल्लाह अल नुजाबा' के एक बड़े नेता को गिरफ्तार किया है। यह नेता पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस यानी PMF के बगदाद बेल्ट ऑपरेशंस में खुफिया निदेशक के रूप में भी काम कर रहा था। इस गिरफ्तारी से साफ पता चलता है कि इराकी सरकार देश के भीतर मिलिशिया के प्रभाव को कम करने के लिए कितनी सख्ती बरत रही है। इसके साथ ही, सीजफायर खत्म होने के तुरंत बाद ईरान के न्याय तंत्र ने गलत जानकारी फैलाने के आरोप में एक ऑनलाइन डिबेट प्रोग्राम पर भी प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे साफ होता है कि देश के भीतर मीडिया पर नियंत्रण और ज्यादा सख्त किया जा रहा है।