अमेरिका का बड़ा बयान, ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव सबसे बड़ा हथियार, इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव वाशिंगटन का सबसे प्रभावी हथियार बना हुआ है। उन्होंने इस रणनीतिक कदम को एक नाजुक नृत्य बताया है, जिसे ईरानी जवाबी कार्रवाई की संभावना को ध्यान में रखते हुए संतुलित किया जा रहा है। यह बात उन्होंने एक शो के दौरान कही, जहां उन्होंने देश की नीति के बारे में खुलकर अपनी बात रखी। इस विकास से पहले राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान के खिलाफ एक क्रश आर्थिक अभियान की घोषणा की थी और ईरानी शासन को समर्थन देने वाले किसी भी संगठन या देश को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।
अमेरिका लगाने जा रहा है अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने घोषणा की कि वाशिंगटन ईरान पर इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने का इरादा रखता है। इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप की आवश्यकता को कम करना है। ट्रेजरी सचिव ने चीन सहित अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भी आग्रह किया कि वे इस देश को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ दें। इसी कड़ी में एक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC ने ईरान से जुड़े 10 लोगों को अपनी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट सोमवार को एक निर्धारित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन प्रतिबंधों के बारे में और अधिक विवरण साझा करेंगे। इस बारे में अधिक जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं।
ईरान ने नए प्रतिबंधों को बताया आर्थिक आतंकवाद
दूसरी तरफ ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन नए अमेरिकी उपायों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन्हें आर्थिक आतंकवाद और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। देश के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावियों को घरेलू अमेरिकी मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला और पुरानी असफल नीतियों का ही विस्तार बताया है। पेंटागन के सलाहकारों के आकलन के बाद अमेरिकी प्रशासन ने आर्थिक दबाव बढ़ाने का यह रुख अपनाया है। सलाहकारों का यह भी मानना था कि सैन्य हमलों की अपनी सीमाएं होती हैं, खासकर तब जब अमेरिका ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने से रोकना चाहता है।