ईरान के साथ जारी तनाव पर अमेरिकी जनरल की चेतावनी, ट्रंप के सलाहकारों से कहा- एयर पावर से नहीं निकलेगा हल.

Nura Basta8 August 20262 min read93 viewsWorld
ईरान के साथ जारी तनाव पर अमेरिकी जनरल की चेतावनी, ट्रंप के सलाहकारों से कहा- एयर पावर से नहीं निकलेगा हल.

अमेरिका के Joint Chiefs of Staff के Chairman जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति Donald Trump के सलाहकारों को ईरान के साथ चल रहे सैन्य टकराव को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका के पास एक ठोस और प्रभावी Exit Strategy होनी चाहिए। उनके अनुसार, केवल हवाई हमलों के जरिए राष्ट्रपति के लक्ष्यों को हासिल करना लगभग असंभव है। यह जानकारी 7 अगस्त 2026 को अमेरिकी मीडिया द्वारा सार्वजनिक की गई थी, जिसके बाद 8 अगस्त 2026 को Al Jazeera ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया।

सैन्य रणनीति पर पुनर्विचार की जरूरत

जनरल केन ने निजी बैठकों के दौरान इस बात पर जोर दिया कि हवाई ताकत की एक सीमा होती है और वह हर सैन्य उद्देश्य के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जुलाई के अंत में हुई एक अहम प्लानिंग बैठक में इस बात को उठाया कि केवल बमबारी से जीत नहीं मिलती। इस समय अमेरिकी सेना के सामने एक बड़ी चुनौती मुनिशंस (हथियारों) की भारी कमी है। रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ कमांडरों ने इसे dangerously low यानी खतरे के स्तर तक कम बताया है, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप भी काफी परेशान हैं।

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मंत्रालयों के बीच तालमेल की कोशिश

पेंटागन और सेंट्रल कमांड ने गोला-बारूद की इस कमी को देखते हुए अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है। जनरल केन लगातार कैबिनेट के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं ताकि सैन्य विकल्पों की सीमाओं पर सभी एक राय रख सकें। इसमें CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शामिल हैं। इन सभी के साथ मिलकर भविष्य के कदमों पर चर्चा की जा रही है ताकि अनावश्यक तनाव को रोका जा सके।

क्यों जरूरी है युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता

यह पहला मौका नहीं है जब ऐसी चिंताएं सामने आई हैं। इससे पहले मार्च 2026 में भी राष्ट्रपति ट्रंप के सलाहकारों ने इस संघर्ष से बाहर निकलने की वकालत की थी। इसके पीछे मुख्य कारण राजनीतिक विरोध, वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतें और इस युद्ध के लिए कांग्रेस की मंजूरी का अभाव है। इसके अलावा, युद्ध के स्पष्ट उद्देश्यों का न होना भी एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इन सैन्य और राजनीतिक सलाहों के बाद व्हाइट हाउस अपनी रणनीति में क्या बड़ा बदलाव करता है।

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