Strait of Hormuz: अमेरिका और जर्मनी के बीच अहम बैठक, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हुई बड़ी चर्चा.

फारस की खाड़ी के पास बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और जर्मनी के बड़े नेताओं ने आपस में फोन पर लंबी बातचीत की है। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio और जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने 24 अगस्त 2026 को यह औपचारिक चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह सुरक्षित रखना था। दुनिया भर के देशों के लिए यह समुद्री रास्ता बहुत जरूरी है, और दोनों नेताओं ने मिलकर इस बात पर जोर दिया कि यहां से गुजरने वाले जहाजों को किसी भी तरह का खतरा नहीं होना चाहिए।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा पर बनी सहमति
इस बातचीत की आधिकारिक पुष्टि अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता Tommy Pigott ने की। दोनों देशों के मंत्रियों ने मिलकर यह तय किया कि वे समुद्री यातायात को सुरक्षित बनाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। इसके अलावा, बातचीत के दौरान इस बात को भी दोहराया गया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए। यह कूटनीतिक कदम पिछले कुछ महीनों से चल रही बैठकों का ही अगला हिस्सा है। इससे पहले 30 जून 2026 को भी दोनों नेताओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर बात की थी। वहीं 31 मार्च 2026 को जर्मनी ने यह इच्छा जताई थी कि अगर वहां हालात सुधरते हैं, तो वह इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा में अपना योगदान देने के लिए तैयार है।
तनाव क्यों बढ़ा और क्या है मौजूदा हालात
यह पूरी बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। हाल ही में दोनों देशों के बीच प्रतिबंधों, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय समुद्री रास्तों को लेकर 60 दिन का समय तय हुआ था, लेकिन यह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अमेरिका लगातार ईरान पर आर्थिक दबाव बना रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका ने 'Operation Economic Outcast' नाम से अभियान चलाया हुआ है, जिसके तहत ईरान से जुड़े कई लोगों और कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन हालात के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापार से जुड़े लोगों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि इस रास्ते पर किसी भी तरह के तनाव का असर सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और यात्रा पर पड़ता है।