अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति गंभीर, 60 दिन का युद्धविराम खत्म होने के बाद बढ़ी टेंशन.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा 60-day ceasefire आधिकारिक रूप से August 17, 2026 को खत्म हो गया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच कोई भी स्थाई शांति समझौता नहीं हो पाया, जिसके बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बातचीत की समयसीमा को खारिज करते हुए ईरान से पूरी तरह आत्मसमर्पण करने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस समय पूरी तरह अराजकता की स्थिति में पहुंच चुका है और कूटनीति के रास्ते अब लगभग बंद हो चुके हैं।
ओमान और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर बढ़ता खतरा
कूटनीतिक बातचीत फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय देशों को भी कड़ी चेतावनी जारी की है। इसमें ओमान को भी एक सीधी चेतावनी दी गई है जो Strait of Hormuz से जहाजों के आने-जाने से जुड़ी हुई है। इस तनाव का सीधा असर समुद्री व्यापार पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से होने वाला जहाजों का आवागमन युद्ध से पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा कम हो गया है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इस रास्ते से व्यापार प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
ईरान का आक्रामक रुख और सैन्य कार्रवाई
कूटनीतिक गतिरोध के जवाब में ईरान ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। ईरानी अधिकारियों और IRGC leadership ने अब रक्षात्मक रुख छोड़कर पूरी तरह से आक्रामक सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा कर दी है। ईरानी सेना के अधिकारियों ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तोड़ने के लिए सटीक सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, ईरानी सेना प्रमुख द्वारा अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ इनाम घोषित करने की भी खबरें सामने आई हैं। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा के हालात बेहद संवेदनशील बन गए हैं।
क्षेत्रीय तनाव और क्षेत्रीय देशों पर असर
इस संघर्ष का दायरा अब ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में भी इसका असर दिखने लगा है। हाल ही में इराकी कुर्दिस्तान सीमा के पास ड्रोन हमले दर्ज किए गए। इसके साथ ही, लाल सागर में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के सैन्य जहाजों पर भी हमले किए गए हैं। इन घटनाओं से मध्य पूर्व में अस्थिरता और ज्यादा गहरी हो गई है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक होती जा रही है, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा में आ रही गिरावट से दैनिक जीवन और आवागमन पर सीधा असर पड़ रहा है।