अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, आर्थिक युद्ध की तैयारी के बीच तेहरान ने पड़ोसी देशों को दी बड़ी चेतावनी।

Aanya22 August 20264 min read94 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, आर्थिक युद्ध की तैयारी के बीच तेहरान ने पड़ोसी देशों को दी बड़ी चेतावनी।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर वर्चस्व को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका की ओर से एक बड़े आर्थिक युद्ध की चेतावनी मिलने के बाद ईरान ने अपने सभी पड़ोसी देशों को साफ शब्दों में आगाह कर दिया है। तेहरान ने दो टूक कहा है कि अगर इस मोर्चे पर किसी भी देश ने अमेरिका का साथ दिया, तो उसे ईरान का सीधा दुश्मन माना जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा घटनाक्रम दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को और अधिक आक्रामक बना रहा है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में खलबली मच गई है।

अमेरिका की नई पाबंदियों की तैयारी और ट्रंप का बयान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि अमेरिका ईरान के खिलाफ इतिहास की सबसे सख्त पाबंदियां लगाने जा रहा है। अमेरिकी वित्त सचिव Scott Bessent इस योजना का आधिकारिक खुलासा करेंगे। अमेरिकी प्रशासन द्वारा लगाए जाने वाले इन नए प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक जीवनरेखा को पूरी तरह से तहस-नहस करना है। इसमें मुख्य रूप से तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय हस्तांतरण, एक्सचेंज हाउस, जहाज पंजीकरण और फ्रंट कंपनियों जैसी सुविधाओं को निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे एक 'Economic D-Day' करार दिया है और ईरान को अलग-थलग करने के लिए अपने सभी सहयोगियों से अमेरिका के साथ खड़े होने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु शक्ति बनने का सपना छोड़ना होगा और उसे किसी भी कीमत पर हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे।

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ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी धमकियों और संभावित आर्थिक प्रतिबंधों के बाद ईरान की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव Mohsen Rezaei ने सरकारी प्रसारक IRIB को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनके सभी पड़ोसी देश अमेरिका के साथ इस आर्थिक युद्ध में शामिल होने से बाज आएं, अन्यथा तेहरान उन्हें अपना दुश्मन मानेगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि पड़ोसी देशों ने इस सलाह को नजरअंदाज किया, तो ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल के निर्यात को पूरी तरह से रोक देगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस रास्ते से तेल की एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी जाएगी। रेजाई ने अमेरिकी कदमों की आलोचना करते हुए कहा कि वाशिंगटन की नीतियों ने वैश्विक परमाणु सुरक्षा को मजबूत करने के बजाय और अधिक असुरक्षा पैदा कर दी है।

ईरान के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के बयान

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने अमेरिकी राष्ट्रपति की आर्थिक युद्ध शुरू करने की धमकी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इन कठोर प्रतिबंधों से ईरानी नागरिकों के बुलंद हौसलों और संकल्प पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्री Sayyid Abbas Araghchi ने भी अमेरिका के इस रवैये की आलोचना की है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि अमेरिका की यह आसन्न घोषणा संयुक्त राष्ट्र के हर स्वतंत्र सदस्य देश पर अतिरिक्त क्षेत्रीय संप्रभुता थोपने के समान है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून में इस प्रकार की सेकेंडरी पाबंदियों का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Major General Abdolrahim Mousavi (या मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही) ने यह चेतावनी दी है कि ईरान दुश्मन की हर धमकी का सैन्य रूप से करारा, दंडात्मक और पूरी तरह से विनाशकारी जवाब देगा।

वैश्विक बाजार और चीन की भूमिका

विश्लेषक फर्म Kpler के साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, चीन, ईरान से निर्यात होने वाले कुल तेल का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदता है। यही वजह है कि अमेरिका ने चीन से भी वाशिंगटन के साथ सहयोग करने का विशेष आग्रह किया है। दूसरी तरफ, होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की ढुलाई लगभग पूरी तरह से ठप हो चुकी है। तेहरान ने इस बेहद अहम जलमार्ग से गुजरने का प्रयास करने वाले किसी भी अनधिकृत तेल टैंकर पर हमला करने की खुली धमकी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहराने का खतरा पैदा हो गया है।

बुल्गारिया से अमेरिकी विमानों की रवानगी

इस पूरे तनाव के माहौल के बीच बाल्कन देश बुल्गारिया की ओर से भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है। बुल्गारिया के रक्षामंत्री Dimitar Stoyanov ने मीडिया को बताया कि ईरान की नाराजगी और बढ़ते तनाव के बीच, दो अमेरिकी टैंकर विमान (KC-135) बुल्गारिया के बेजमर एयरबेस से सफलतापूर्वक रवाना हो गए हैं। हालांकि, इन तमाम सैन्य गतिविधियों और जुबानी जंग के बीच पिछले लगभग छह महीनों से दोनों पक्षों के बीच सीधे तौर पर कोई गोलीबारी तो नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि दोनों देश शांति वार्ता की दिशा में किसी भी प्रकार से आगे बढ़ रहे हैं। अमेरिका की तरफ से आने वाले दिनों में और सख्त कदम उठाए जाने की संभावना है, जिससे आने वाले समय में स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

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