US और Iran के बीच बातचीत अटकी, तेहरान की कड़ी शर्तों के कारण नहीं बन पा रही है कोई सहमति.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत बिना किसी बड़े समझौते के रुक गई है। इस गतिरोध का मुख्य कारण तेहरान की सख्त मांगें और सीधे तौर पर आमने-सामने बात करने से इनकार करना है। NATO Defence College के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ Richard Weitz ने 9 अगस्त 2026 को मीडिया को बताया कि अमेरिका को ईरान की कई शर्तें मंजूर नहीं हैं और वह इन्हें डील तोड़ने वाली मानता है। दोनों देशों के बीच यह स्थिति तब बनी हुई है जब बीच के देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
ईरान की सीधी बातचीत से इनकार और मध्यस्थों की भूमिका
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने 9 अगस्त को इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका के साथ इस समय कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि दोनों देश केवल ओमान और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों के जरिए ही एक-दूसरे तक संदेश पहुंचा रहे हैं। ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका जून में हुए अंतरिम समझौते का उल्लंघन करना बंद नहीं करता और इस नुकसान की भरपाई नहीं करता, तब तक सीधी बातचीत शुरू नहीं हो सकती है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सुरक्षा परिषद ने रणनीतिक Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए कई बड़ी शर्तें रखी हैं।
होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने और प्रतिबंध हटाने की शर्तें
ईरान की ओर से रखी गई इन शर्तों में अमेरिका से यह गारंटी मांगना शामिल है कि वह कभी ईरान को धमकी नहीं देगा। इसके अलावा, ईरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने, क्षेत्र से सैन्य संपत्तियों को हटाने, युद्ध से हुए नुकसान का पूरा मुआवजा देने, सभी प्रतिबंधों को हटाने और बिना किसी शर्त के रोके गए पैसों को जारी करने की मांग की है। विशेषज्ञ Richard Weitz का मानना है कि ये शर्तें यह दिखाती हैं कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स देश के विदेश मंत्रालय पर फिर से अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है।
ओमान के साथ शिपिंग समझौते पर चर्चा और भविष्य की स्थिति
मौजूदा बैठकों में शामिल अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से अभी और अधिक सीधी बातचीत करने की कोई तुरंत योजना नहीं है। इसके अलावा, ईरान के अंदर भी आगे बढ़ने के रास्ते को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। हालांकि ओमान और ईरान के बीच Strait of Hormuz को लेकर एक शिपिंग समझौते पर काम अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि अकेले इस समझौते से यह जरूरी जलमार्ग पूरी तरह नहीं खुलेगा। इसके लिए कुछ खास नियमों और शर्तों को पूरा करना होगा। इस तरह की अप्रत्यक्ष बातचीत के कारण दोनों तरफ से अलग-अलग संदेश मिल रहे हैं, जिससे आपसी समझ बनना मुश्किल हो रहा है और बात आगे नहीं बढ़ पा रही है।