US और Iran के बीच तनाव बढ़ा, 17 अगस्त 2026 को खत्म हो रहा है सीजफायर समझौता.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब और ज्यादा गहराता जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच हुआ 60-दिन का महत्वपूर्ण सीजफायर समझौता बिना किसी फाइनल डील के खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। इस समझौते की समयसीमा आगामी 17 अगस्त 2026 को समाप्त हो रही है, जिससे दुनिया भर के देशों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार चरम पर पहुंचता जा रहा है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान की मांग और अमेरिका का कड़ा रुख
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार की नई परमाणु वार्ता शुरू करने से पहले युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा यानी वार डैमेज रिपेरेशंस देना जरूरी होगा। उनकी इस शर्त ने बातचीत के रास्ते पूरी तरह से बंद कर दिए हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के ट्रेजरी സെക്രട്ടറി Scott Bessent ने आने वाले दिनों में अभूतपूर्व और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी लगातार जारी है, जहां अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने सुरक्षा कारणों से 60 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों को दूसरे रास्ते पर डायवर्ट कर दिया है।
घरेलू मोर्चे पर कड़े कानून और क्षेत्रीय मध्यस्थता
ईरान के घरेलू राजनीतिक हालात में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। देश की संसद ने रविवार को एक नया बिल पास किया जिसके तहत विदेशी मीडिया आउटलेट्स, जिन्हें सरकार शत्रु मानती है, उनके साथ संपर्क रखने को पूरी तरह से अपराध घोषित कर दिया गया है। इस नए नियम के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 6 महीने से 2 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। इस बढ़ती हुई अस्थिरता और तनाव के माहौल के बीच पाकिस्तान, ओमान और इराक जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थ देश लगातार कूटनीतिक बातचीत के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और तेल निर्यात के रास्ते को सुरक्षित करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो।