अमेरिका और ईरान की तनातनी से कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल, UAE ने उठाए बड़े कदम

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे हफ्ते जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण बाजार का रुख पूरी तरह से बदल गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार आ रही बाधाओं और जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की वजह से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ईरान ने साफ कह दिया है कि जब तक अमेरिका जून 2026 के शांति समझौते का पूरी तरह पालन नहीं करता, तब तक यह रास्ता बंद ही रहेगा। इस स्थिति का असर आम आदमी से लेकर पूरी अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर पड़ रहा है।
तनाव बढ़ने की वजह और राजनीतिक हलचल
दोनों देशों के बीच 17 अगस्त से 19 अगस्त 2026 के दौरान हुआ अस्थायी युद्धविराम खत्म होने के बाद कूटनीतिक रिश्ते बेहद खराब हो गए हैं। ईरान ने इसके जवाब में आक्रामक सैन्य रुख अपना लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 20 अगस्त 2026 को ऐलान किया कि ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे, जिसकी पूरी रूपरेखा अगले हफ्ते सामने आएगी। वहीं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस स्थिति को आर्थिक दबाव का एक नया चरण बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM अरब सागर में लगातार नौसैनिक नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रहा है और अब तक कुल 67 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है, जबकि 3 को बेकार किया गया और 2 जहाजों की तलाशी ली गई है।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय देशों पर असर
ईरान के विदेश मंत्री عباس عراقچی (अब्बास अराकची) ने 20 अगस्त 2026 को बयान देते हुए अमेरिकी धमकियों को पूरी तरह से नाकाम नीतियों और आर्थिक आतंकवाद करार दिया। उनका कहना था कि अमेरिका अपने देश की आर्थिक समस्याओं से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने बड़ा कदम उठाते हुए ईरान के साथ अपने सभी वित्तीय और आर्थिक लेनदेन अगले आदेश तक पूरी तरह से रोक दिए हैं। इसके अलावा सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हूती विद्रोहियों द्वारा हमलों के दावे ने क्षेत्रीय अशांति को और बढ़ा दिया है। ईरानी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार चीन ने भी अमेरिका के इन नए प्रतिबंधों का खुलकर विरोध किया है।