अमेरिका और ईरान में बढ़ा तनाव, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना जंग का नया अड़ा

मध्य पूर्व में हालात तेजी से खराब हो रहे हैं और अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। 17 अगस्त को दोनों देशों के बीच हुए 60 दिन के संघर्ष विराम की अवधि समाप्त होने के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 22 अगस्त 2026 को साउथ कैरोलिना में एक रैली के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर दिया और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर सीधे तौर पर आम लोगों और ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
समुद्री नाकाबंदी और कड़े प्रतिबंध
अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों के खिलाफ लगातार समुद्री नाकाबंदी की जा रही है। 20 अगस्त तक इस अभियान के तहत 67 वाणिज्यिक जहाजों को डायवर्ट किया गया और नियमों की जांच के लिए कई जहाजों को रोका गया। इस कार्रवाई के जवाब में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने नए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को सभी राष्ट्रों के खिलाफ युद्ध की घोषणा करार दिया। वहीं, ईरानी सैन्य प्रमुख Ali Abdollahi ने चेतावनी दी कि दुश्मनों की ओर से उठाया गया कोई भी नया कदम एक विनाशकारी प्रतिक्रिया को आमंत्रित करेगा।
ऊर्जा बाजार और तेल आपूर्ति पर असर
इस बढ़ते संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 93 डॉलर के पार पहुंच गई हैं क्योंकि कमर्शियल ऑपरेटर ईरान के नियंत्रण वाले उत्तरी मार्ग से बचने के लिए ओमान के समुद्री रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अमेरिकी ऊर्जा विभाग लगातार ग्लोबल सप्लाई चेन पर नजर बनाए हुए है। ऊर्जा सचिव Chris Wright ने जानकारी दी कि टैंकरों के लिए फिलहाल सैन्य सुरक्षा गार्ड सक्रिय नहीं हैं, लेकिन ऊर्जा परिवहन को स्थिर रखने के लिए भविष्य में यह विकल्प खुला रखा गया है। इस बारे में अधिक जानकारी Energy Department Official Website पर देखी जा सकती है।
मानवीय नुकसान और फंसा हुआ तेल
पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक 756 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जिनमें 22 अगस्त को casualty tracking system में जोड़े गए 60 नए सैनिक भी शामिल हैं। विश्लेषक संस्था Kpler के अनुसार, अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी की वजह से 40 मिलियन बैरल से अधिक ईरानी तेल समुद्र में फंसा हुआ है। हालांकि, इन सबके बीच ओमान और ईरान के अधिकारी इस जलमार्ग से जुड़े मुद्दों पर कूटनीतिक बातचीत को फिर से शुरू करने के रास्ते तलाश रहे हैं ताकि हालात को सामान्य बनाया जा सके।