अमेरिका का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार, गल्फ देशों समेत इन व्यापारिक साझेदारों पर भी लटकी तलवार.

अमेरिका ने ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों पर शिकंजा कसते हुए 24 अगस्त 2026 को एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' रखा गया है, जिसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से दुनिया से अलग करने की तैयारी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इस सख्त कदम का मुख्य मकसद ईरान के उन सभी रास्तों को बंद करना है, जिनकी मदद से वह वैश्विक बाजार में व्यापार कर रहा था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे किसी भी देश के खिलाफ की जाने वाली अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई बताया है।
किन सेक्टरों पर कसा गया शिकंजा
इस नई अमेरिकी नीति के तहत पांच मुख्य क्षेत्रों को पूरी तरह से टारगेट किया गया है। इनमें डिजिटल एसेट्स, टैक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग शामिल हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के तेल निर्यात, साइबर ऑपरेशन और परमाणु व मिसाइल तकनीकी से जुड़े लगभग 60 संस्थानों, व्यक्तियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। अमेरिका के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल यानी OFAC ने उस जनरल लाइसेंस को भी सस्पेंड कर दिया है, जिसके जरिए खेल से जुड़े आदान-प्रदान की अनुमति मिलती थी। इस संबंध में अधिक जानकारी OFAC की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
गल्फ देशों और अन्य व्यापारिक साझेदारों पर असर
अमेरिका ने उन देशों की सूची भी जारी की है जो ईरान के साथ व्यापार कर रहे हैं और अब अमेरिकी रडार पर हैं। इस लिस्ट में चीन, तुर्किए, इराक, ओमान, पाकिस्तान, भारत, आर्मेनिया, अजरबैजान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नाम शामिल है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई ने एहतियात के तौर पर तेहरान के साथ अपने ट्रांजैक्शन यानी लेन-देन को रोकने का काम शुरू कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के बारे में विस्तार से व्हाइट हाउस की आधिकारिक विज्ञप्ति में पढ़ा जा सकता है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इस बदलते हालात पर नजर रखना बहुत जरूरी हो गया है, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय व्यापार और उड़ानों पर भी पड़ सकता है।
ईरान और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
अमेरिका के इस कड़े कदम के बाद ईरान के भीतर भी उथल-पुथल शुरू हो गई है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री अली मदानिजादेह का दावा है कि उनके देश के पास इस दबाव से निपटने के लिए दो साल की योजना तैयार है। वहीं संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबॉफ ने इन धमकियों को बेअसर बताया है। इन सबके बीच ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। दूसरी तरफ, चीन के विदेश मंत्रालय ने 25 अगस्त 2026 को इन प्रतिबंधों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इनका कोई अंतरराष्ट्रीय कानूनी आधार नहीं है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी फैसले का समर्थन किया है, जबकि अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने फारस की खाड़ी यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद सैन्य विकल्पों पर भी विचार करने की बात कही है। इसके अलावा अमेरिका ने हिजबुल्लाह को फिर से वैश्विक आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है और वित्तीय गतिविधियों में शामिल 10 लोगों को निशाना बनाया है।