US ने ईरान पर लगाए अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध, अमेरिका के नए एक्शन से मची खलबली.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक शिकंजा कस दिया है। अमरीकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने 24 अगस्त 2026 को 'Operation Economic Outcast' नाम से एक नए और कड़े अभियान का ऐलान किया है। इस नए वित्तीय प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य ईरान के सभी आर्थिक रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है। इस अभियान को आर्थिक डी-डे कहा गया है, जिसके तहत डिजिटल संपत्ति, सोना, विमानन, तकनीक और शिपिंग सेक्टर पर पाबंदियों का दायरा बढ़ा दिया गया है।
प्रतिबंधों का दायरा और अमेरिकी चेतावनी
अमरीकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अगर कोई भी संस्था ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करती पाई गई, तो उसे अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस कदम का पूरा समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह रही है और यह किसी भी देश के खिलाफ की जाने वाली सबसे जबरदस्त आर्थिक कार्रवाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी देश तेहरान की मदद करेगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir से अपील की है कि वे बातचीत शुरू कराने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें।
ईरान का कड़ा रुख और जवाबी चेतावनी
अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरानी अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाया है। ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madani-Zadeh ने कहा कि अमेरिका इस बार भी पूरी तरह विफल रहेगा और देश के पास अपनी वित्तीय जरूरतों को संभालने के लिए दो साल की खास योजना तैयार है। संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इन कदमों कोरी बयानबाजी करार दिया है। इसके अलावा सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei के सलाहकार Mohammad Mokhber ने और अधिक आक्रामक जवाब देने की बात कही है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने तो यहाँ तक चेतावनी दे डाली है कि यदि यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले सभी तेल निर्यात को रोक सकता है।
बाजारों पर असर और मुद्रा में गिरावट
इस बड़े राजनीतिक और आर्थिक टकराव का असर सीधे तौर पर मुद्रा बाजारों पर देखने को मिला है। प्रतिबंधों की घोषणा के बाद 24 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल गिरकर अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया। इस पूरी स्थिति से मध्य पूर्व के देशों में तनाव का माहौल बन गया है और हर कोई आने वाले दिनों के हालात पर नजर बनाए हुए है।