US Navy Blockade: अमेरिका ने अरब सागर में ईरान के खिलाफ की सख्त कार्रवाई, 62 कमर्शियल जहाजों को किया डायवर्ट.

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने शुक्रवार, 14 अगस्त को एक बड़ा बयान जारी किया है। इस बयान में बताया गया कि अमेरिकी नौसेना ने अरब सागर में ईरान के खिलाफ लगाए गए अनिश्चितकालीन समुद्री नाकाबंदी के दौरान कुल 62 कमर्शियल जहाजों को उनके रास्ते से डायवर्ट कर दिया है। इसके अलावा 3 जहाजों को निष्क्रिय किया गया और 2 जहाजों पर नौसेना के जवानों ने बोर्डिंग की कार्रवाई की है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य जहाजों की पहचान और उनके कार्गो की जांच करना है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर असर
इस सख्ती के बाद Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। संघर्ष से पहले के मुकाबले अब बहुत कम जहाज इस रास्ते से आ-जा रहे हैं। टैंकर-ट्रैकिंग डेटा से यह भी साफ पता चलता है कि जब से 14 जुलाई को यह नाकाबंदी दोबारा लागू की गई है, तब से ईरान से होने वाले तेल के निर्यात में लगभग पूरी तरह से रोक लग गई है। इस स्थिति ने खाड़ी देशों में काम करने वाले लोगों और व्यापार से जुड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण है और उन्होंने इस नाकाबंदी को एक 'स्टील वॉल' यानी लोहे की दीवार करार दिया है। दूसरी तरफ, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नियंत्रण वाले फारस खाड़ी जलमार्ग प्रबंधन प्राधिकरण ने जलडमरूमध्य को तब तक बंद घोषित कर दिया है जब तक कि सभी आर्थिक प्रतिबंध हटा नहीं लिए जाते और उनके जमे हुए फंड को वापस नहीं किया जाता।
यह तनाव तब और ज्यादा बढ़ गया जब 13 अगस्त को जलडमरूमध्य में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दो सरकारी जहाजों पर हमलों की खबरें सामने आईं। अमेरिका इस आर्थिक दबाव को और अधिक बढ़ाने की योजना बना रहा है और भविष्य में भी सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने विदेशी जहाजों पर तटीय प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाया है। तैनात नौसेना के जवानों को हो रही मुश्किलों और ऑपरेशनल दबाव के बावजूद अमेरिकी सेना ने यह साफ कर दिया है कि वे लगातार जहाजों को बदलकर इस नाकाबंदी को लंबे समय तक जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।