अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर बढ़ाई सख्ती, 70 कमर्शियल जहाजों को किया गया डायवर्ट.

अमेरिकी नौसेना ने दुनिया भर के समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ और ज्यादा मजबूत करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। 23 अगस्त 2026 को अमेरिकी नौसेना ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनके बलों ने ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए सख्त नाकाबंदी के तहत अब तक कुल 70 कमर्शियल जहाजों को सफलतापूर्वक दूसरे रास्ते पर मोड़ दिया है। इस कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने तीन जहाजों को निष्क्रिय कर दिया और दो जहाजों पर बोर्डिंग यानी कब्जा करके जांच की। यह ताजा आंकड़ा केवल दो दिन पहले बताए गए 68 जहाजों की तुलना में हुई बढ़ोतरी को साफ तौर पर दिखाता है, जिससे साफ है कि फारस की खाड़ी और उसके आसपास के इलाकों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
समुद्री निगरानी और नाकाबंदी का पूरा डेटा
मैरीटाइम इंटरडिक्शन यानी समुद्री अवरोध के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि अमेरिकी नौसेना की इस कार्रवाई में लगातार तेजी आ रही है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस अभियान के तहत 20 अगस्त को 67 जहाजों को डायवर्ट किया गया था, जबकि 17 अगस्त को यह आंकड़ा 64 और 9 अगस्त को 55 जहाजों का था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM इस पूरी नाकाबंदी की निगरानी कर रहा है, जिसकी शुरुआत आधिकारिक तौर पर 14 जुलाई 2026 को हुई थी। इस ऑपरेशन का मुख्य निशाना वे सभी जहाज हैं जो ईरान के तटीय इलाकों और बंदरगाहों की तरफ आ-जा रहे हैं।
नौसेना की भारी तैनाती और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा
इस नाकाबंदी को सफल बनाने के लिए अमेरिकी सेना ने अपने ताकतवर युद्धपोतों को तैनात किया है। इसमें गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर जैसे USS Ross (DDG 71) और USS Boxer (LHD 4) के साथ-साथ मैरीटाइम एविएशन यूनिट्स भी शामिल हैं, जो लगातार गश्त कर रही हैं और नियमों का पालन न करने वाले जहाजों को रोक रही हैं। अमेरिकी सेना का यह तर्क है कि ये सभी कदम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वैश्विक शिपिंग यानी अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी की सुरक्षित आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके अलावा, इसका मकसद कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने वाली ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रोकना भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पूरे ऑपरेशन को 12 अगस्त को 'वॉल ऑफ स्टील' करार दिया था और स्ट्रेट पर पूरी अमेरिकी पकड़ का दावा किया था।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है भारी असर
इस अमेरिकी नाकाबंदी और कड़े प्रतिबंधों की वजह से ईरान को भारी आर्थिक और राजनीतिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 18 अगस्त को खुद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने यह बात कबूल की थी कि इस नाकाबंदी और इससे जुड़े प्रतिबंधों ने देश के आयात और निर्यात को बुरी तरह से बाधित कर दिया है। अमेरिका की तरफ से आने वाले नए प्रतिबंधों के जवाब में, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने 23 अगस्त को बयान दिया कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए अपनी क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर जाकर मनमानी कर रहा है। इसी बीच, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रजाई ने भी 23 अगस्त को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी देश अमेरिका के नेतृत्व वाले इन प्रतिबंधों में शामिल होगा, उसे ईरान का दुश्मन माना जाएगा। हालांकि इन सबके बीच, ईरान ने बगदाद के अनुरोध पर कुछ इराकी तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी है, लेकिन बाकी बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयास अभी भी पूरी तरह से अटके हुए हैं। जून के महीने में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और स्ट्रेट को दोबारा खोलने के लिए जो समझौता ज्ञापन साइन किया गया था, वह भी पिछले हफ्ते बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया।