अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किया इकोनॉमिक डी-डे का ऐलान, ट्रंप बोले- नहीं टिकेगा तेहरान

Nura Basta22 August 20262 min read57 viewsWorld
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किया इकोनॉमिक डी-डे का ऐलान, ट्रंप बोले- नहीं टिकेगा तेहरान

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ एक बड़े आर्थिक युद्ध का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की आर्थिक और सैन्य स्थिति बहुत खराब हो चुकी है और देश में महंगाई दर 350% तक पहुंच गई है। इस बीच संघर्ष के छह महीने पूरे होने पर अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने के लिए कमर कस ली है और इसे 'Economic D-Day' का नाम दिया गया है।

ईरान को आर्थिक रूप से तोड़ने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ चेतावनी दी है कि जो भी सरकार, कंपनी या बैंक ईरान को आर्थिक मदद या सहारा देगा, उसे भारी अंजाम भुगतना होगा। उनका कहना है कि अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर पूरा नियंत्रण है और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं हासिल करने दिया जाएगा। इस मुहिम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी पूरा समर्थन दिया है और कहा है कि ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव सबसे असरदार हथियार साबित हो रहा है। वहीं ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने दुनिया भर के देशों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक आर्थिक घेराबंदी में अमेरिका का साथ दें।

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ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका के इस ऐलान पर ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया के जरिए कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इस अभियान को पूरी तरह विफल बताया और कहा कि यह अमेरिका के अपने भारी कर्ज और ब्याज दरों के संकट से ध्यान भटकाने की चाल है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वे इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और पहले भी ऐसे दबावों का सामना कर चुके हैं। इस बीच ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने भी किसी भी संभावित आक्रामकता का करारा जवाब देने की बात कही है।

युद्ध का असर और ओमान के साथ व्यापार

जमीनी हालात की बात करें तो पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक इस संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक कम से कम 18 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 757 घायल हुए हैं। तनाव के इस माहौल के बीच ईरान ने क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ओमान के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। दूसरी ओर चीन ने इस तरह की दबाव की राजनीति का विरोध करते हुए राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कही है। अमेरिका ने भी तेहरान की मदद करने के आरोप में लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं।

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