अमेरिका में ईरान के खिलाफ युद्ध का समर्थन हुआ कम, राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता भी सबसे निचले स्तर पर

अमेरिका में ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को लेकर जनता का मूड बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। एक नए सर्वे के मुताबिक इस युद्ध को समर्थन देने वाले लोगों की संख्या घटकर सिर्फ 31 प्रतिशत रह गई है जो कि इस संघर्ष की शुरुआत के बाद से सबसे कम आंकड़ा है। इस सर्वेक्षण में देश भर के आम लोगों से बातचीत की गई और उनकी राय जानी गई ताकि यह पता चल सके कि लोग इस मौजूदा स्थिति के बारे में क्या सोचते हैं।
सर्वे के आंकड़े और जनता की राय
समाचार एजेंसी रॉयटर और इप्सोस की तरफ से एक नया सर्वे किया गया जो 21 अगस्त से 24 अगस्त 2026 के बीच पूरा हुआ। इस देशव्यापी सर्वे में कुल 1,215 वयस्क अमेरिकी नागरिकों ने हिस्सा लिया था। इस पोल में मार्जिन ऑफ एरर 3 प्रतिशत बताया गया है। आंकड़ों के अनुसार रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच भी युद्ध का समर्थन कम हुआ है और यह मार्च महीने के 77 प्रतिशत से गिरकर अब 69 प्रतिशत पर आ गया है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग भी अपने कार्यकाल के सबसे निचले स्तर यानी 33 प्रतिशत पर बनी हुई है।
लंबा खिंचता युद्ध और बढ़ती महंगाई
सर्वे के डेटा से यह बात भी सामने आई है कि लगभग 83 प्रतिशत अमेरिकियों को यह लगता है कि यह युद्ध अभी और लंबी अवधि तक चलेगा। आपको बता दें कि यह संघर्ष इस साल की शुरुआत यानी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के साथ शुरू हुआ था। इस महीने की शुरुआत में 80 प्रतिशत लोग और मार्च के शुरुआती दिनों में 60 प्रतिशत लोग ऐसा सोचते थे लेकिन अब यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। जनता के बीच इस तरह की नाराजगी का एक बड़ा कारण पेट्रोल और डीजल के दामों में आई भारी तेजी भी है। वर्तमान में गैसोलीन की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से प्रति गैलन 1 डॉलर से भी ज्यादा महंगी हो चुकी हैं जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। राजनीतिक माहौल की बात करें तो आगामी चुनावी मुकाबलों में स्वतंत्र मतदाता डेमोक्रेट्स पार्टी को रिपब्लिकन की तुलना में ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं जहां डेमोक्रेट्स को 33 प्रतिशत और रिपब्लिकन्स को 19 प्रतिशत समर्थन मिल रहा है।
आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नए कदम
एक तरफ जहां जनता में असंतोष बढ़ रहा है वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर ईरान के खिलाफ आर्थिक शिकंजा कसने की तैयारियां तेज हो गई हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को एक नए अभियान की घोषणा की जिसका नाम 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' रखा गया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव बनाना है ताकि उसके सभी तरह के राजस्व स्रोतों विशेषकर तेल के व्यापार को पूरी तरह से रोका जा सके। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भी तेहरान के साथ व्यापार करने से हतोत्साहित किया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए यह सैन्य अभियान चलाना बेहद जरूरी कदम था। यह पूरा सर्वे नॉलेज पैनल के माध्यम से किया गया था जिसमें उम्र, लिंग, नस्ल, शिक्षा, पारिवारिक आय और राजनीतिक पार्टी की संबद्धता जैसे सभी जरूरी पहलुओं का पूरा ध्यान रखा गया था।