अमेरिका का बड़ा एक्शन, ईरान के साथ तेल व्यापार करने वाली 4 भारतीय कंपनियों पर लगाया प्रतिबंध.

अमेरिका ने ईरान के साथ तेल के कारोबार को रोकने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है, जिसके तहत चार भारतीय कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। अमरीकी सरकार के इस नए कदम से व्यापार जगत में हलचल मच गई है और इन कंपनियों के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत कार्रवाई
संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' रखा है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इन भारतीय कंपनियों पर ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद, बिक्री, परिवहन और मार्केटिंग में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया गया है। अमरीकी प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ईरान सरकार के उन वित्तीय स्रोतों को पूरी तरह से बंद करना है, जिनका इस्तेमाल क्षेत्रीय स्तर पर अस्थिरता फैलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका की ओर से जिन चार भारतीय फर्मों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनके नाम Portease Partners LLP, Sadashiva Overseas Limited, PP Softtech Private Limited और Prakrutees Infra Impex Private Limited हैं। इस बारे में अधिक जानकारी ANI News रिपोर्ट में दी गई है।
प्रतिबंध के पीछे का कानूनी आधार और आंकड़े
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ईरानी शासन को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोकने के लिए की गई है। इन प्रतिबंधों को लागू करने के लिए अमेरिका ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13846 का सहारा लिया है, जो ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बड़े सौदों पर रोक लगाता है। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने बताया कि यह नीति अवैध हथियारों की खरीद और ऊर्जा बिक्री जैसी गतिविधियों पर लगाम कसती है। इन कंपनियों पर करोड़ों डॉलर के तेल कारोबार के आरोप हैं। उदाहरण के लिए, Sadashiva Overseas Limited ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच लगभग 69 मिलियन डॉलर यानी करीब 570 करोड़ रुपये के ईरानी तेल उत्पादों का आयात किया। वहीं दूसरी ओर, PP Softtech Private Limited ने लगभग 25 मिलियन डॉलर और Prakrutees Infra Impex Private Limited ने मई 2023 से फरवरी 2026 के बीच 25 मिलियन डॉलर के उत्पादों का लेनदेन किया।
वैश्विक व्यापार और भविष्य के हालात
अमेरिकी सरकार की इस सख्ती से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साफ संदेश गया है कि जो भी कंपनियां तेहरान के साथ व्यापार जारी रखेंगी, उन्हें अमरीकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। इस नीति का दायरा बढ़ाकर निजी कंपनियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि वे ईरानी बाजार या अमरीकी वित्तीय प्रणाली में से किसी एक को चुनें। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को मिलने वाले फंड को काटना है। आने वाले समय में इन प्रभावित भारतीय फर्मों के लिए डॉलर या अमरीकी वित्तीय नेटवर्क के जरिए सीमा पार व्यापार करना बेहद कठिन हो जाएगा। ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनाव के कारण वैश्विक व्यापार बाजार में भी अस्थिरता का माहौल बनता जा रहा है।