UAE में ईरान के शैडो फ्लीट पर अमेरिका का कड़ा एक्शन, यूएई ने भी ईरान के साथ व्यापार किया बंद।

Sushma Kumari24 August 20262 min read75 viewsUAE
UAE में ईरान के शैडो फ्लीट पर अमेरिका का कड़ा एक्शन, यूएई ने भी ईरान के साथ व्यापार किया बंद।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ईरान के गुप्त रूप से चलने वाले जहाजों और कंपनियों पर अमेरिका ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 24 अगस्त 2026 को ईरान के 'शैडो फ्लीट' यानी छाया बेड़े से जुड़ी कंपनियों और जहाजों पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इस पूरी कार्रवाई का मुख्य मकसद ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करना है ताकि उसकी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके। इस कदम से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां कारोबार करने वाले प्रवासियों के बीच भी चर्चा का माहौल गर्म हो गया है।

अमेरिका का आर्थिक डी-डे और यूएई का सख्त कदम

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने इस पूरी रणनीति को आर्थिक डी-डे का नाम दिया है। अमेरिका का साफ कहना है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए यूएई में मौजूद इन जहाजों और कंपनियों का इस्तेमाल कर रहा था। साल 2026 की शुरुआत से ही अमेरिका इस गुप्त नेटवर्क को तोड़ने के लिए 100 से ज्यादा जहाजों पर प्रतिबंध लगा चुका है। दूसरी तरफ, क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यूएई सरकार ने भी इस हफ्ते एक बड़ा फैसला लिया है। यूएई ने ईरान के साथ सभी प्रकार के कमर्शियल एक्टिविटीज, व्यापारिक लेन-देन और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से सस्पेंड कर दिया है। यूएई सरकार ने उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें यह कहा जा रहा था कि वह ईरान को किसी भी तरह की वित्तीय सुविधा दे रहा है। सरकार ने इन दावों को एक निराधार मीडिया अभियान बताया है।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव

अमेरिका और यूएई के इन सख्त फैसलों के बाद ईरान की तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पुराने समझौतों पर वापस लौटने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर, ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर आर्थिक दबाव इसी तरह जारी रहा तो फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले तेल के निर्यात को पूरी तरह से बंद किया जा सकता है। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि जो भी देश अमेरिका के इन नए प्रतिबंधों का समर्थन करेगा, उसे युद्ध जैसी कार्रवाई माना जाएगा। इस बढ़ते तनाव का असर क्षेत्र में काम करने वाले आम लोगों और व्यापार पर भी पड़ सकता है, जिससे हर कोई स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

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