अमेरिका के सीनेटरों ने इसराइली मंत्री बेन-गवीर के गाज़ा पर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा की, पद से हटाने की मांग की।

Sushma Kumari21 August 20262 min read59 viewsWorld
अमेरिका के सीनेटरों ने इसराइली मंत्री बेन-गवीर के गाज़ा पर दिए गए बयानों की कड़ी निंदा की, पद से हटाने की मांग की।

गाज़ा के नागरिकों को लेकर दिए गए विवादित और अमानवीय बयानों के बाद इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben-Gvir चारों तरफ से घिर गए हैं। अमरीकी सीनेटर Elissa Slotkin ने 21 अगस्त 2026 को इसराइली मंत्री के बयानों की कड़ी निंदा की और इसे बेहद हिंसक और शर्मनाक बताया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे बयान नेतन्याहू सरकार के लिए एक बड़ा धब्बा हैं और इस तरह की बातें करने वाले नेता को तुरंत उसके पद से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने उन सभी लोगों से आगे आकर आवाज उठाने की अपील की जो इसराइल और फिलिस्तीन दोनों जगहों के आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद रहते हैं।

विवादित इंटरव्यू और हमलों को तेज करने की मांग

यह पूरा विवाद एक इंटरव्यू के बाद सामने आया जो 20 अगस्त 2026 को रिपोर्ट किया गया था। इस इंटरव्यू में मंत्री Itamar Ben-Gvir ने देश के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के उस फैसले का खुलकर विरोध किया था जिसमें हवाई हमलों को कम करने की बात कही गई थी। मंत्री ने अपनी बात रखते हुए टार्गेटेड हत्याओं की वकालत की और कहा कि इसराइली सेना को हर रात तीस से चालीस लोगों को खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने आगे यह भी कहा कि वहां कुछ ऐसे लोग भी मौजूद हैं जो जीने के लायक नहीं हैं और उन्हें जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वे इंसान कहलाने के लायक भी नहीं हैं। उनके इन बयानों के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मच गई और मानवाधिकारों को लेकर चिंता जताई जाने लगी।

अमरीका की एक अन्य सीनेटर Jacky Rosen ने भी इस निंदनीय बयानबाजी में अपनी आवाज जोड़ी और इसे पूरी तरह से डरावना और बचाव से परे बताया। उनका साफ कहना था कि जो भी व्यक्ति निर्दोष आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा भड़काने की बात करता है, वह किसी भी सरकारी पद पर बने रहने के लायक नहीं है। इसके अलावा कई समर्थक समूहों ने भी मंत्री के इन बयानों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। इन समूहों ने यह स्पष्ट किया है कि मंत्री के ये विचार इसराइल सरकार की आधिकारिक नीति को नहीं दर्शाते हैं। इसके साथ ही इन संगठनों ने प्रधानमंत्री पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि वे इस मामले में अपनी स्थिति साफ करें और मंत्री को सरकार से बाहर करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।

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