अमेरिका का ईरान पर बड़ा आर्थिक हमला, कड़े प्रतिबंधों का ऐलान कर राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया आर्थिक डी-डे

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच अब वाशिंगटन ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है और ईरान के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर ली है। कूटनीतिक प्रयास जब पूरी तरह से ठप पड़ गए, तब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नए अभियान को आर्थिक डी-डे यानी 'economic D-Day' का नाम दिया है। अमेरिका का यह फैसला ईरान की सरकार को मिलने वाले हर एक आर्थिक सहारे को पूरी तरह से तोड़ने के लिए उठाया गया है, जिसे अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला बताया जा रहा है।
अमेरिका के इस बड़े कदम की घोषणा अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा आज 24 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार शाम को की जाएगी। इस नई योजना के तहत ईरान के बचे हुए सभी व्यापारिक रास्तों को निशाना बनाया जाएगा, जिसमें मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों का परिवहन, एक्सचेंज हाउस और फ्री-ट्रेंड जोन के जरिए होने वाले पैसों का लेन-देन और जहाजों के रजिस्ट्रेशन शामिल हैं। इस घोषणा से ठीक एक दिन पहले यानी 23 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर अमेरिकी हमलों को रोकने का ऐलान किया था, हालांकि तेहरान ने इस बात से साफ इनकार किया है कि इस समय कोई भी सक्रिय बातचीत चल रही है।
ईरान की मुद्रा में भारी गिरावट और यूएई का बड़ा फैसला
इस मचे घमासान के बीच ईरान की करेंसी रियाल बहुत ज्यादा कमजोर हो गई है और डॉलर के मुकाबले गिरकर 2.02 मिलियन रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही, खाड़ी देशों में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है जहां संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने, जो कभी क्षेत्र में ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार हुआ करता था, तेहरान के साथ अपने सभी प्रकार के व्यापार को पूरी तरह से बंद करने की पुष्टि कर दी है। ईरान को यह शक है कि यूएई का यह फैसला अमेरिका के साथ मिलकर लिया गया है ताकि तेहरान पर दबाव और ज्यादा बढ़ाया जा सके।
ईरान के अधिकारियों की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी
अमेरिका के इन कड़े फैसलों पर ईरान के अधिकारियों ने बहुत सख्त और गुस्से वाली प्रतिक्रिया दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने बहुत तीखी धमकी देते हुए कहा है कि इस प्रतिबंध का समर्थन करने वाले किसी भी देश को युद्ध जैसी कार्रवाई करने वाला माना जाएगा। रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि अगर यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले तेल के निर्यात को पूरी तरह से बंद किया जा सकता है। इसके अलावा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने भी यह साफ कह दिया कि अमेरिकी प्रतिबंधों का साथ देने वाले देशों को बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा और उनके हाथ बंधे हुए नहीं हैं।
आगे की कूटनीति और बातचीत की कोशिशें
तनाव के इस माहौल के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पिछले जून महीने में अमेरिका के साथ साइन किए गए समझौता ज्ञापन को फिर से शुरू करने की वकालत की है। उधर, ईरान के पूर्व केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासर हेम्मती का कहना है कि ईरान साल 2018 से 2020 के बीच लगाए गए अधिकतम दबाव जैसे हालातों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है और देश पर इन सबका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राजनायिक एलन आयर ने इन प्रतिबंधों के असर को लेकर अपनी शंका जताई है और कहा है कि इस संघर्ष की वजह से केवल वहां के कट्टरपंथियों की ताकत ही बढ़ रही है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य के मामलों को लेकर ईरान और ओमान के बीच क्षेत्रीय बातचीत आगामी मंगलवार यानी 25 अगस्त 2026 को फिर से शुरू होने वाली है।