अमेरिका ने बदला फैसला, ईरान के साथ तनाव के बाद मिडिल ईस्ट के दूतावासों में फिर से बढ़ाएगा स्टाफ

अमेरिका ने फरवरी 2026 में ईरान के साथ हुए संघर्ष के बाद मिडिल ईस्ट के देशों में अपने दूतावासों और मिशन में स्टाफ को फिर से बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के आंतरिक दस्तावेजों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रक्रिया इसी हफ्ते यानी 24 अगस्त 2026 के हफ्ते से शुरू होने जा रही है। इस कदम के बाद इस्राइल, जॉर्डन और ओमान में अमेरिकी मिशन फिर से पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देंगे। इस बदलाव को लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा के हालात में एक नए मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
अलग-अलग देशों के लिए तय की गई है नई क्षमता
विदेश विभाग ने यह साफ किया है कि वह लगातार सुरक्षा हालातों की समीक्षा कर रहा है ताकि विदेश नीति के कामों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा सके। सभी जगह एक साथ स्टाफ को पूरी क्षमता पर नहीं लाया जा रहा है। लेबनान, सऊदी अरब, कतर और यूएई में अमेरिकी मिशन 85% स्टाफ के साथ काम करेंगे। वहीं इराक, कुवैत और बहरीन में अधिकृत कर्मियों की संख्या को 75% तक सीमित रखा गया है। लेबनान उन शुरुआती जगहों में शामिल है जहां स्टाफ वापस लौटेगा, हालांकि अभी वहां भी पूरी क्षमता बहाल नहीं होगी।
परिवारों के आने पर रोक रहेगी जारी
कई गल्फ देशों और लेबनान में अभी भी अमेरिकी राजनयिकों के परिवार के सदस्यों के आने पर रोक लगी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यह फैसला इस बात को ध्यान में रखकर लिया गया है कि सुरक्षा का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है और सावधानी बरतना जरूरी है। इस पूरी स्थिति पर जानकारों की अलग-अलग राय सामने आई है। इस्राइल में अमेरिका के पूर्व राजदूत डैन शापीरो का कहना है कि इस फैसले से ऐसा लगता है कि प्रशासन को यह विश्वास हो गया है कि अब युद्ध थम रहा है। वहीं, नियर ईस्ट अफेयर्स के पूर्व उप सहायक सचिव रॉबर्ट डैनिन का कहना है कि इस कदम का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भविष्य में ईरान के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा, विदेश विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जॉन आर बास ने बताया कि परिवारों पर रोक जारी रहने से यह साफ होता है कि सरकार अभी भी बहुत सावधानी से आगे बढ़ रही है।
ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की कोशिश जारी
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत फिलहाल रुकी हुई है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 24 अगस्त 2026 को ईरान की अर्थव्यवस्था को निशाना बनाते हुए नए सेकेंडरी प्रतिबंधों का ऐलान किया था। इससे यह साफ होता है कि कूटनीतिक स्तर पर स्टाफ की वापसी के बावजूद ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति पर लगातार काम कर रहा है। गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की यात्रा करने वाले लोगों के लिए इन सुरक्षा बदलावों और प्रशासनिक नीतियों पर लगातार नजर रखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की अनिश्चितता से बचा जा सके।