War on Iran: अमेरिका में हथियारों की भारी कमी, पेंटागन ने रक्षा कंपनियों को दिया सख्त आदेश.

ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध के पांच महीने पूरे होने से पहले ही अमेरिकी सेना के हथियार भंडार तेजी से खाली होने लगे हैं। इस स्थिति ने अमेरिकी रक्षा विभाग और सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद पेंटागन ने हथियारों के उत्पादन को तेज करने के लिए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संघर्ष के दौरान बड़े पैमाने पर हथियारों का इस्तेमाल हुआ है जिससे ग्लोबल स्तर पर भी हथियारों के स्टॉक पर असर पड़ा है।
हथियारों के स्टॉक में आई भारी गिरावट
अल जज़ीरा इंग्लिश की 11 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास हथियारों के स्टॉक में बहुत कमी आ गई है। रॉयटर्स ने 4 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी थी कि अमेरिकी सेना ने अपनी लंबी दूरी की सटीक मार करने वाली मिसाइलें जैसे ATACMS और PrSM का लगभग पूरा इस्तेमाल कर लिया है। इसके अलावा पैट्रियट और थाड इंटरसेप्टर मिसाइलें तथा टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों का भंडार भी काफी कम हो गया है। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ग्लोबल स्तर पर पैट्रियट इंटरसेप्टर का स्टॉक पिछले हफ्ते 2,200 से घटकर 827 से भी कम रह गया है, जबकि थाड मिसाइलों का स्टॉक 452 से गिरकर 278 से नीचे आ गया है।
पेंटागन का नया निर्देश और अधिकारियों के बयान
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अमेरिकी उप रक्षा सचिव Steve Feinberg ने 6 अगस्त 2026 को एक मेमो जारी किया। इस मेमो में रक्षा उद्योग के प्रमुखों को निर्देश दिया गया कि वे 21 दिनों के भीतर हथियार उत्पादन और डिलीवरी की रफ्तार को तेजी से बढ़ाने की योजना जमा करें। उन्होंने कहा कि सालों लंबी विकास प्रक्रिया अब स्वीकार्य नहीं है। हालांकि पेंटागन के प्रवक्ता Sean Parnell ने 9 अगस्त को इस मेमो की पुष्टि की, लेकिन इसे रक्षा उद्योग को मजबूत करने की एक सामान्य प्रक्रिया बताया। इससे पहले 6 अगस्त को उन्होंने हथियारों की कमी की खबरों को गलत बताया था।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हथियारों की कमी की खबरों को खारिज किया और कहा कि देश के पास पर्याप्त सामान है। साथ ही उन्होंने गोपनीय जानकारी लीक करने वाले अधिकारियों को लंबी जेल भेजने की धमकी दी। वहीं, Rheinmetall के सीईओ Armin Papperger ने 7 अगस्त को बताया कि अमेरिकी सैन्य भंडारों को फिर से भरने में काफी लंबा समय लगेगा और यह काम दो साल में पूरा नहीं हो पाएगा। मध्य पूर्व में चल रहे इस तनाव के कारण हथियारों की यह किल्लत पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है।