पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी डॉक्टरों के लिए ट्रेनी रिजर्व की सीटें बढ़ाई गई

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ट्रेनी रिजर्व श्रेणी के तहत डॉक्टरों की अधिकतम संख्या को 477 से बढ़ाकर 662 कर दिया है। इस संबंध में विभाग ने शुक्रवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले से उन सरकारी मेडिकल अधिकारियों को बड़ी राहत मिलेगी जो नियमित ड्यूटी के साथ ही अपनी उच्च शिक्षा जारी रखना चाहते हैं।
क्या है ट्रेनी रिजर्व श्रेणी और इसके फायदे
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ट्रेनी रिजर्व श्रेणी में वे सरकारी मेडिकल अधिकारी आते हैं जिन्हें अपनी स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री या डिप्लोमा की पढ़ाई पूरी करने के लिए नियमित ड्यूटी से अस्थायी राहत दी जाती है। इस दौरान उनकी सेवा बरकरार रहती है। यह विशेष सुविधा मुख्य रूप से उन डॉक्टरों को मिलती है जो ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस श्रेणी में पश्चिम बंगाल हेल्थ सर्विस, पश्चिम बंगाल पब्लिक हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस और पश्चिम बंगाल हेल्थ एजुकेशन सर्विस के अधिकारी शामिल होते हैं।
क्यों लिया गया सरकार ने यह फैसला
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में बढ़ोतरी करना है। लंबे समय से विभिन्न चिकित्सक संगठनों की ओर से इस सीमा को बढ़ाने की मांग उठ रही थी। संगठनों का तर्क था कि ट्रेनी रिजर्व की सीटें सीमित होने के कारण कई योग्य डॉक्टर एमडी (MD) और एमएस (MS) जैसे उच्च पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने से वंचित रह जाते थे।
पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अधिक डॉक्टरों को पढ़ाई का मौका मिलेगा। भविष्य में जब ये डॉक्टर अपनी पढ़ाई पूरी करके लौटेंगे, तो इससे आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। पहले सीटों की कमी के कारण स्नातकोत्तर की कई सीटें खाली रह जाती थीं, लेकिन अब नई संख्या के साथ राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक बड़ा आधार तैयार हो सकेगा। सरकार के इस सकारात्मक निर्णय को चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।