Yemen Al-Mokha Port Attack: यमन के अल-मोखा पोर्ट पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला, 7 लोगों की मौत और 30 घायल.

यमन के लाल सागर के पास स्थित महत्वपूर्ण बंदरगाह al-Mokha पर हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर से भयानक हमला कर दिया है। इस दुखद घटना में कुल 7 लोगों की जान चली गई है, जिसमें 4 सैन्यकर्मी और 3 आम नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा इस हमले में लगभग 30 लोग बुरी तरह से घायल बताए जा रहे हैं, जिनका इलाज स्थानीय अस्पतालों में चल रहा है। यह हमला रविवार, 9 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था जो लगातार सोमवार तक जारी रहा, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
हूती विद्रोहियों ने दागे कई मिसाइल और ड्रोन
यमेनी सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों जिन्हें Ansarallah के नाम से भी जाना जाता है, उन्होंने इस बंदरगाह को निशाना बनाने के लिए एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे। इतना ही नहीं, विद्रोहियों ने बंदरगाह के पास बने मुख्य पियर को उड़ाने के लिए एक विस्फोटक से भरी नाव का भी इस्तेमाल करने की कोशिश की। हालांकि, यमन की सरकारी सेना और एयर डिफेंस ने अपनी सूझबूझ दिखाते हुए कई ड्रोनों को हवा में ही नष्ट कर दिया और पानी में आ रही विस्फोटक नाव के हमले को भी नाकाम कर दिया।
बंदरगाह की बुनियादी संरचना को भारी नुकसान
इस भीषण हमले की वजह से al-Mokha पोर्ट की बुनियादी संरचना को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बंदरगाह पर बनी इमारतें, कमर्शियल सुविधाएं, पियर, व्यापारिक सामान और खाने-पीने की जरूरी सप्लाई पूरी तरह से तबाह हो गई है। इसके अलावा धमाकों की वजह से उड़े मलबे और शेल के टुकड़े आसपास के रिहायशी इलाकों में भी जा गिरे, जिससे आम लोगों के घरों को भी नुकसान पहुंचा है। चिकित्सा सूत्रों से मिली शुरुआती अपडेट के अनुसार, इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 11 तक पहुंच सकती है, जिसमें 8 सैन्यकर्मी और 3 नागरिक शामिल हैं, जबकि घायलों का कुल आंकड़ा 32 तक पहुंच गया है।
अधिकारियों की कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी
हूती सेना के प्रवक्ता Yahya Saree ने इस ऑपरेशन के पीछे सऊदी सैनिकों के ठिकाने और हथियारों के गोदाम होने का दावा किया है और बड़े पैमाने पर तबाही की बात कही है। दूसरी तरफ, प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन Rashad al-Alimi सहित यमन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे आर्थिक संस्थानों और समुद्री मार्गों के खिलाफ ईरान की बढ़ती चाल करार दिया है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब साल 2022 से चला आ रहा संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम लगभग टूट चुका है, जिसके बाद यमन के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र को संभावित खतरों को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है।